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पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी की तारीख तय, 23 सितंबर को जिला परिषद-प्रधान के पदों का होगा निर्धारण

जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की तैयारियां अब एक बार फिर तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण लॉटरी की नई तारीख तय कर दी है। इसके तहत 23 सितंबर को जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य, प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के पदों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी। वहीं, 24 सितंबर को उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के पदों का आरक्षण निर्धारित कर लॉटरी निकाली जाएगी।

पंचायतीराज विभाग के आयुक्त एवं शासन सचिव डॉ. जोगाराम ने बुधवार को इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही लंबे समय से आरक्षण लॉटरी का इंतजार कर रहे संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी तेज होने की संभावना है।

पहले 17 और 18 सितंबर को होनी थी लॉटरी

पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण लॉटरी का कार्यक्रम पहले 17 सितंबर और 18 सितंबर को निर्धारित किया गया था। 17 सितंबर को प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के पदों तथा 18 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए लॉटरी निकाली जानी थी।

हालांकि, 15 सितंबर को यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था। उस समय प्रदेश में शहरी निकायों के प्रमुखों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी। इसी वजह से पंचायत आरक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था।

इससे पहले भी 16 अगस्त को पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी स्थगित की गई थी। उस समय 18 अगस्त को सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए आरक्षण लॉटरी प्रस्तावित थी। अब विभाग की ओर से नई तारीख जारी होने के बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है।

23 सितंबर को जिला स्तर पर आरक्षण

नई व्यवस्था के तहत 23 सितंबर को जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्यों, प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के पदों का आरक्षण तय किया जाएगा। इसके बाद 24 सितंबर को उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए आरक्षण लॉटरी होगी।

आरक्षण तय होने के बाद पंचायत चुनाव में दावेदारी करने वाले नेताओं के लिए तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। किस पंचायत में कौन-सी सीट किस वर्ग या महिला के लिए आरक्षित होगी, इसके आधार पर संभावित प्रत्याशी अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ा सकेंगे।

ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में सरकार का जवाब

पंचायत चुनाव के आरक्षण से जुड़ा मामला न्यायिक स्तर पर भी चर्चा में है। राजस्थान सरकार ने निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा है। सरकार का कहना है कि ओबीसी आरक्षण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए लॉटरी के माध्यम से तय किया गया है।

सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर रखा गया है।

यह मामला जिला प्रमुख के पदों पर ओबीसी आरक्षण से जुड़ी आपत्ति के बाद सामने आया। याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि 41 जिलों में जिला प्रमुख के पदों में ओबीसी के लिए केवल पांच पद आरक्षित किए गए। याचिकाकर्ता की ओर से ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया था।

आरक्षण के बाद तेज होगी चुनावी हलचल

पंचायत चुनाव में आरक्षण लॉटरी की तारीख तय होने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। आरक्षण की स्थिति सामने आते ही संभावित उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय होंगे।

23 और 24 सितंबर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि जिला परिषद सदस्य, प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच और वार्ड पंच के कितने पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होंगे। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम की अगली प्रक्रिया पर भी निगाह रहेगी।

फिलहाल सरकार और प्रशासन का फोकस आरक्षण प्रक्रिया को निर्धारित तारीखों पर पूरा कराने पर है। पंचायत चुनाव से जुड़े उम्मीदवारों के लिए 23 और 24 सितंबर की तारीखें अहम मानी जा रही हैं।