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विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस छोड़ी: डोटासरा पर 10 बड़े आरोप, RAS-REET से टिकट बंटवारे तक उठाए सवाल

राजस्थान कांग्रेस में निकाय चुनाव के बाद शुरू हुआ अंदरूनी विवाद अब बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में बदल गया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने गांधी जयंती के दिन पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे से पहले उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भरतपुर-डीग के स्थानीय संगठन पर लगातार तीखे हमले किए थे। उन्होंने टिकट वितरण, पार्टी की चुनावी हार, RAS और REET जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर आरोप लगाए और डोटासरा के इस्तीफे की मांग तक कर दी।

विश्वेंद्र सिंह ने अपने इस्तीफे में पार्टी की मौजूदा कार्यशैली, कथित चापलूसी की संस्कृति और अपने सम्मान-सम्मान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि ऐसी परिस्थितियों में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान के साथ अलग होना बेहतर है। उनके इस्तीफे की खबर के साथ ही राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

1. भरतपुर-डीग में हार के लिए जिलाध्यक्षों को जिम्मेदार बताया

विश्वेंद्र सिंह ने हाल में हुए शहरी निकाय चुनावों में भरतपुर और डीग में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों जिलाध्यक्षों ने टिकट वितरण में अपने पसंदीदा लोगों को प्राथमिकता दी और पार्टी के पुराने व सक्रिय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया।

उन्होंने कहा कि जनता ने चुनाव में इसका जवाब दे दिया। विश्वेंद्र सिंह के मुताबिक, संगठन में टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी चुनावी नतीजों में दिखाई दी।

यह आरोप ऐसे समय सामने आया जब निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर कई जिलों में हार की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने को लेकर चर्चा चल रही थी।

2. डोटासरा पर भी सीधा हमला

विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर-डीग के दोनों जिला अध्यक्षों के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी निशाने पर लिया।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जिन नेताओं ने पहले पार्टी को नुकसान पहुंचाया, जनता इस बार उन्हें जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने डोटासरा पर दोनों जिलाध्यक्षों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।

एक अन्य बयान में उन्होंने कहा कि जब तक दोनों जिलाध्यक्ष और उन्हें बचाने वाला प्रदेश नेतृत्व पद पर रहेगा, तब तक कांग्रेस का उठना मुश्किल है।

3. ‘सीएम के गृह जिले में पार्टी को डुबो दिया’

विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर को मुख्यमंत्री के गृह जिले के रूप में संदर्भित करते हुए कांग्रेस संगठन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्र में कांग्रेस को मजबूत स्थिति में होना चाहिए था, लेकिन स्थानीय नेतृत्व ने पार्टी को कमजोर कर दिया।

उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नेतृत्व पूरे मामले पर चुप है। उनका कहना था कि पार्टी की स्थिति सुधारने के लिए प्रदेश नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए।

4. RAS भर्ती को लेकर लगाए गंभीर आरोप

विश्वेंद्र सिंह के सबसे गंभीर आरोप RAS भर्ती को लेकर रहे। उन्होंने डोटासरा के परिवार और रिश्तेदारों से जुड़े कुछ चयन मामलों का जिक्र करते हुए इंटरव्यू में समान अंक दिए जाने पर सवाल उठाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के कथित प्रभाव का इस्तेमाल करके इंटरव्यू में अंक दिलाए गए और पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए।

विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के बेटे के RAS चयन और OBC नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र से जुड़े लाभ का भी उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने डोटासरा के समधी के परिवार से जुड़े OBC लाभ पर भी सवाल उठाए।

हालांकि ये सभी आरोप विश्वेंद्र सिंह द्वारा लगाए गए हैं और इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है। डोटासरा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

5. REET परीक्षा को लेकर जांच की मांग

विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते हुए हुई REET परीक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं से मेहनत करने वाले युवाओं को नुकसान हुआ।

उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। विश्वेंद्र सिंह का कहना था कि जांच और कार्रवाई से युवाओं का सरकार के प्रति भरोसा कायम रह सकता है।

REET से जुड़ा यह आरोप भी उनके राजनीतिक हमले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

6. भरतपुर में दिए बयान पर डोटासरा को घेरा

विश्वेंद्र सिंह ने एक पुराने कार्यक्रम में डोटासरा के भरतपुर को लेकर दिए गए कथित बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बयाना में स्वर्गीय बृजेन्द्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में डोटासरा ने कहा था कि भरतपुर में रास्ता बताने के भी पैसे लिए जाते हैं।

विश्वेंद्र सिंह ने इसे भरतपुर की जनता का अपमान बताते हुए डोटासरा पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अगली बार डोटासरा भरतपुर आएंगे तो उन्हें रास्ता भी बताया जाएगा और स्वागत-सत्कार भी किया जाएगा।

इस बयान के जरिए विश्वेंद्र सिंह ने स्थानीय नेतृत्व के साथ अपने राजनीतिक मतभेद को और सार्वजनिक कर दिया।

7. ‘भ्रष्ट नेताओं को इस्तीफा देना चाहिए’

विश्वेंद्र सिंह ने अपने बयानों में भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे नेताओं को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए या कांग्रेस आलाकमान को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने पार्टी नेतृत्व से आरोपों की जांच कराने की मांग की और डोटासरा की भूमिका पर लगातार सवाल उठाए।

यह विवाद केवल स्थानीय संगठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी आलाकमान तक पहुंच गया।

8. डीग में टिकट वितरण को लेकर सवाल

विश्वेंद्र सिंह ने डीग नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण का उदाहरण भी दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 40 वार्डों में से पांच वार्डों में गलत टिकट दिए गए और इन सभी सीटों पर कांग्रेस को शर्मनाक परिणाम का सामना करना पड़ा।

उनका आरोप था कि चुनावी हार की समीक्षा करने के बजाय संबंधित जिला अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का बचाव करने में लगे रहे।

निकाय चुनाव के परिणामों के बाद टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस के भीतर उठे सवालों ने पार्टी की स्थानीय गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया था।

9. ‘चापलूसी की परंपरा से कार्यकर्ताओं में आक्रोश’

विश्वेंद्र सिंह ने अपने इस्तीफे से पहले एक पोस्ट में पार्टी के भीतर कथित चापलूसी की संस्कृति पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा अपनी अंतरात्मा की आवाज पर फैसले लिए हैं। उनका आरोप था कि कुछ नेताओं के बयानों से उनके कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और वे स्वयं भी इससे आहत हैं।

उन्होंने लिखा कि उन्होंने जीवन में मान, सम्मान और स्वाभिमान के साथ समझौता नहीं किया। साथ ही कहा कि अगर सच को सच कहना और गलत का साथ नहीं देना पाप है, तो वे यह काम आगे भी करते रहेंगे।

10. ‘स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर’

विश्वेंद्र सिंह के इस्तीफे का सबसे चर्चित हिस्सा उनका स्वाभिमान को लेकर दिया गया बयान रहा।

उन्होंने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन जनता की देन है और उनका राजनीतिक जीवन कार्यकर्ताओं तथा क्षेत्र की जनता के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन को खुली किताब और बेदाग बताते हुए कहा कि वे अपने दामन पर दाग नहीं लगने देंगे।

इसके बाद उन्होंने लिखा कि ऐसी परिस्थितियों में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान के साथ अलग होना बेहतर है। उन्होंने अपने पुरखों की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कांग्रेस की मौजूदा रीति-नीति के साथ आगे कदमताल नहीं कर पाएंगे और पार्टी को अलविदा कहना ही उचित समझते हैं।

इस्तीफे से पहले कार्रवाई की चर्चा

विश्वेंद्र सिंह के इस्तीफे से पहले उनके खिलाफ कांग्रेस संगठन की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई की चर्चा भी सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी लगातार बयानबाजी को लेकर पार्टी के भीतर शिकायतें पहुंची थीं।

भरतपुर और डीग के जिला अध्यक्षों की ओर से प्रदेश कांग्रेस कमेटी को रिपोर्ट दिए जाने की भी बात सामने आई। रिपोर्ट में उन पर पार्टी संगठन को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देने के आरोप लगाए जाने की चर्चा थी।

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि पार्टी नेतृत्व उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा था। हालांकि, विश्वेंद्र सिंह ने कार्रवाई होने से पहले ही कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया।

डोटासरा ने आरोपों पर दी प्रतिक्रिया

विश्वेंद्र सिंह के आरोपों के बाद गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। NDTV राजस्थान के अनुसार, 1 अक्टूबर को डोटासरा ने पहली बार इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। विवाद में निकाय चुनाव के टिकट वितरण और भर्ती से जुड़े आरोप प्रमुख मुद्दे रहे हैं।

इससे पहले विश्वेंद्र सिंह डोटासरा से सार्वजनिक रूप से इस्तीफे की मांग कर चुके थे। दोनों नेताओं के बीच बढ़ता विवाद अब विश्वेंद्र सिंह के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी के लिए एक बड़ा संगठनात्मक घटनाक्रम बन गया है।

अब आगे क्या?

विश्वेंद्र सिंह के कांग्रेस छोड़ने के बाद राजस्थान की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनके भाजपा में जाने की संभावना पर चर्चा हुई है, लेकिन इस समय उनके अगले राजनीतिक कदम की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि निकाय चुनाव के बाद शुरू हुआ भरतपुर-डीग का विवाद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचा और विश्वेंद्र सिंह के इस्तीफे के साथ यह टकराव पार्टी से उनके अलग होने तक पहुंच गया। उनके लगाए RAS, REET, टिकट वितरण और संगठनात्मक कार्यशैली से जुड़े आरोप अब राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं, जबकि इन आरोपों की तथ्यात्मक जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही उनकी पुष्टि या खंडन किया जा सकता है।