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राहुल गांधी का बालाघाट दौरा: कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत पर सरकार को घेरा

बालाघाट: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले का दौरा किया। उन्होंने बिरसा ब्लॉक के जगला गांव पहुंचकर बैगा जनजाति के आदिवासियों से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी कुपोषण और मलेरिया के कारण जान गंवाने वाले मासूम बच्चों के पीड़ित परिवारों से मिले और उनका दर्द साझा किया।

राहुल गांधी करीब एक घंटे तक जगला गांव में रुके, जहां उन्हें देखने और मिलने के लिए आसपास के गांवों से लगभग डेढ़ हजार आदिवासी पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल का निरीक्षण कर बच्चों से मिड-डे मील के बारे में जानकारी ली।

 

पिछले 3 महीनों में 32 बच्चों की मौत; लोकसभा में मुद्दा उठाने का किया ऐलान

बालाघाट जिले के आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर राहुल गांधी ने राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा:

  • सरकारी तंत्र पूरी तरह फेल: राहुल गांधी ने कहा कि पिछले तीन महीनों में जिले में कुपोषण और मलेरिया की चपेट में आने से 32 आदिवासी बच्चों की जान जा चुकी है। यह स्थिति साबित करती है कि बीमारी से निपटने में राज्य सरकार पूरी तरह नाकाम रही है।

  • संसद में उठाएंगे आवाज: उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में आदिवासियों की उपेक्षा और बच्चों की मौतों के इस गंभीर मुद्दे को वे आगामी लोकसभा सत्र में पुरजोर तरीके से उठाएंगे। वहीं, कांग्रेस का दावा है कि कुपोषण से हुई मौतों का वास्तविक आंकड़ा 32 से कहीं अधिक है।

 

'न केंद्र सरकार है न राज्य सरकार, आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़ा'

पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया:

  • स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार ठप: राहुल ने कहा, "क्षेत्र में बीमारियों और कुपोषण से बच्चों की जानें जा रही हैं, लेकिन सरकार की ओर से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसा लगता है मानो मध्य प्रदेश के आदिवासियों को भारत के बीचों-बीच अकेला छोड़ दिया गया हो—जैसे उनके लिए न केंद्र सरकार है और न ही राज्य सरकार।"

  • अधिकारों से वंचित करने का आरोप: उन्होंने कहा कि इलाके में मनरेगा पूरी तरह ठप है, वन अधिकार कानून को ईमानदारी से लागू नहीं किया जा रहा और आदिवासियों को जमीन के पट्टे तक नहीं मिल रहे हैं।

  • मुआवजे से वंचित पीड़ित: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बच्चों की असमय मौत के बावजूद पीड़ित परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है और आधी से ज्यादा आबादी अब भी सहायता राशि से वंचित है। इसके अलावा उन्होंने आदिवासी महिलाओं को 'लाड़ली बहना योजना' का लाभ न मिलने का मुद्दा भी उठाया।

 

एमपी की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक का गणित

मध्य प्रदेश की सियासत में राहुल गांधी के इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है:

  • 21.1% आबादी: मध्य प्रदेश की कुल जनसंख्या में आदिवासियों (ST) की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत है, यानी राज्य का हर पांचवां नागरिक आदिवासी समुदाय से आता है।

  • 84 विधानसभा सीटों पर असर: प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं, जबकि 37 अन्य सामान्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस तरह कुल 84 सीटों पर इस वर्ग का सीधा प्रभाव है।

  • लोकसभा सीटें: राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से 6 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राहुल गांधी के इस दौरे पर पलटवार करते हुए इसे महज एक 'राजनीतिक माइलेज' लेने की कवायद करार दिया है।