संजय भाटिया के साथ सहयोग के लिए पार्टी ने कविता पाटीदार और कुलजीत चहल को राजस्थान का सह-प्रभारी (Co-incharge) बनाया है।
राजस्थान में सह-प्रभारी बनाए गए दोनों नेता पार्टी संगठन का लंबा अनुभव रखते हैं:
कुलजीत चहल: मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले कुलजीत चहल वर्तमान में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) के उपाध्यक्ष हैं। वे दिल्ली बीजेपी में लंबे समय से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं और 'नमो ऐप' (NaMo App) के राष्ट्रीय संयोजक (National Convener) के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
कविता पाटीदार: मध्य प्रदेश के महू की रहने वाली कविता पाटीदार राज्यसभा सांसद और भाजपा की राष्ट्रीय सचिव हैं। वे एमपी के मालवा क्षेत्र से पार्टी का प्रमुख ओबीसी (OBC) चेहरा मानी जाती हैं। वे प्रदेश महामंत्री और इंदौर जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उनके पिता भेरूलाल पाटीदार मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस पहले बड़े संगठनात्मक फेरबदल में राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले तीन प्रमुख नेताओं को भी अन्य राज्यों में अहम प्रभार दिए गए हैं:
सतीश पूनिया: राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को पंजाब के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर का भी प्रभारी नियुक्त किया गया है।
अलका गुर्जर: राज्यसभा सांसद अलका गुर्जर को पंजाब में सतीश पूनिया के साथ सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुनील बंसल: भाजपा के वरिष्ठ संगठनात्मक नेता सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे दो बड़े राज्यों के प्रभारी पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। बंसल इससे पहले लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में संगठन महामंत्री और प्रभारी के रूप में अपनी मजबूत कार्यशैली का लोहा मनवा चुके हैं।
राजस्थान में पिछले काफी समय से प्रदेश प्रभारी को बदलने की चर्चाएं जोरों पर थीं:
26 महीने का कार्यकाल: डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल जुलाई 2024 में राजस्थान के प्रभारी नियुक्त किए गए थे और करीब 26 महीने तक इस पद पर रहे।
संगठन से अनबन: बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से वे राजस्थान के कामकाज में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। इसके पीछे मुख्य वजह प्रदेश संगठन के साथ उनका बेहतर तालमेल नहीं बैठ पाना माना जा रहा था।
सार्वजनिक रूप से जताई थी नाराजगी: राधामोहन दास ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से प्रदेश संगठन की कार्यशैली को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद से ही उनके विकल्प की तलाश शुरू हो गई थी।
भविष्य की संभावनाएं: हाल ही में नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम के गठन में भी राधामोहन दास को महामंत्री पद में जगह नहीं मिली थी। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है या अन्य कोई बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी दी जा सकती है।