गौरतलब है कि कांग्रेस आलाकमान ने शनिवार को ही सचिन पायलट को पंजाब के प्रभारी महासचिव की नई और अहम जिम्मेदारी सौंपी है।
सचिन पायलट ने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा:
सेनाध्यक्ष ने किया था कमिशन्ड: "साल 2012 में आज ही के दिन (6 सितंबर) मुझे तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल विक्रम सिंह ने टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमिशन्ड किया था।"
चुनौतीपूर्ण अनुभव: पायलट ने आगे लिखा कि केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रशासनिक कर्तव्यों को निभाते हुए सेना में कमीशन मिलना अपने आप में कई बड़ी चुनौतियों और गंभीर जिम्मेदारियों से भरा अनुभव था।
राजनीति और सेना के प्रति अपने समर्पण को लेकर पायलट ने लिखा:
सख्त अनुशासन और संतुलन: जनसेवा की व्यस्तताओं और सेना की सेवा के लिए अनिवार्य कड़े अनुशासन व समर्पण के बीच संतुलन बनाना आसान काम नहीं था।
गर्व का सफर: उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा अद्वितीय सफर रहा है, जिसे उन्होंने हमेशा बेहद गर्व, निष्ठा और पक्के संकल्प के साथ पूरा किया है।
सचिन पायलट की सैन्य यात्रा बेहद प्रेरणादायी रही है:
प्रमोशन का सफर: सितंबर 2012 में केंद्रीय मंत्री रहते हुए प्रादेशिक सेना जॉइन करने के बाद उन्हें कैप्टन पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद अक्टूबर 2023 में मेजर पद की परीक्षा पास कर वे अब मेजर के पद पर तैनात हैं।
नियमित सक्रियता: पायलट हर साल अनिवार्य रूप से कुछ समय टेरिटोरियल आर्मी में अपनी सेवाएं देते हैं। वे अक्सर दिल्ली कैंट स्थित अपनी यूनिट में जाते हैं और सैन्य बैठकों व अभ्यासों में हिस्सा लेते हैं।
हाल ही में पंजाब के प्रभारी बने सचिन पायलट की इस पोस्ट के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं:
स्थानीय व भावनात्मक जुड़ाव: जन्मदिन के अवसर पर 124 सिख रेजिमेंट पर गर्व जताने को पंजाब के स्थानीय व भावनात्मक कनेक्ट से जोड़कर देखा जा रहा है।
सियासी मायने: चूंकि सिख रेजिमेंट का पंजाब की संस्कृति और जनमानस से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है, ऐसे में राज्य का नया प्रभारी बनने के बाद उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है।