चंद्रशेखर आजाद के साथ भीम आर्मी के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद थे। उनके गोंडा पहुंचने की सूचना के बाद बाराबंकी और गोंडा पुलिस के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी। इस दौरान चंद्रशेखर आजाद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। समर्थकों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की के बाद मौके पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। समर्थकों ने पुलिस पर जबरन रोकने का आरोप लगाया।
दरअसल, गोंडा के रेक्सडिया गांव निवासी 45 वर्षीय विनोद कुमार साहनी बर्तन की दुकान चलाते थे। पुलिस के मुताबिक, बुधवार रात करीब 10:30 बजे दुकान बंद करने के बाद वह बाइक से घर लौट रहे थे। परसपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर धनावा इलाके में कुछ लोगों ने कथित तौर पर उनकी बाइक के सामने वाहन लगाकर उन्हें रोक लिया।
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट को लेकर विनोद और आरोपियों के बीच बातचीत शुरू हुई। देखते ही देखते मामला विवाद में बदल गया। आरोप है कि कहासुनी के बाद विनोद के साथ मारपीट की गई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए लखनऊ स्थित केजीएमयू ले जाया गया, जहां गुरुवार को उनकी मौत हो गई।
विनोद की मौत के बाद पुलिस ने मामले में हत्या से संबंधित धाराएं बढ़ा दी हैं और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। हालांकि, घटना के पूरे कारण और विवाद की पृष्ठभूमि को लेकर पुलिस जांच जारी है।
मामले को लेकर लखनऊ में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। केजीएमयू के बाहर कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद, VIP पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी और सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप ने धरना दिया था। नेताओं ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं, गोंडा में स्थानीय लोगों ने भी विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम किया।
अब चंद्रशेखर आजाद को पीड़ित परिवार से मिलने से रोके जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। आजाद समाज पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। वहीं प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें रोके जाने की कार्रवाई की गई है।
विनोद साहनी की मौत से जुड़े इस मामले में अब पुलिस जांच, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय की मांग के साथ-साथ राजनीतिक दबाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गोंडा और आसपास के इलाकों में पुलिस-प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है।