नामांकन वापस लेने के बाद पराक्रम सिंह राठौड़ ने कहा कि उनके पैनल के पास 32 मतों का स्पष्ट समर्थन था और वे चुनाव जीतने की स्थिति में थे। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व के निर्देश को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि उनका पैनल पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रहा था, लेकिन संगठन के फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने नामांकन वापस लिया। पराक्रम ने यह भी बताया कि पैनल की ओर से कुछ नामांकन केवल तकनीकी कारणों से सुरक्षा के तौर पर डमी उम्मीदवार के रूप में दाखिल किए गए थे।
पराक्रम सिंह राठौड़ ने कहा कि बृजकिशोर उपाध्याय उनके पुराने सहयोगी और भाई समान हैं। क्रिकेट प्रशासन में दोनों लंबे समय से साथ काम करते रहे हैं। पार्टी के निर्देश और आपसी सहमति के बाद उन्होंने बृजकिशोर उपाध्याय के समर्थन में अपनी दावेदारी छोड़ दी।
राजनीतिक और खेल हलकों में इस कदम को संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
केवल अध्यक्ष पद ही नहीं, बल्कि पराक्रम सिंह राठौड़ के पूरे पैनल ने अपने नामांकन वापस ले लिए हैं। इसी क्रम में उपाध्यक्ष पद के दावेदार पवन दिलावर, जो मंत्री मदन दिलावर के पुत्र हैं, उन्होंने भी चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया है।
लगातार हो रही नाम वापसी के बाद अब आरसीए की छह सदस्यीय नई कार्यकारिणी के निर्विरोध चुने जाने की संभावना काफी बढ़ गई है। इससे चुनावी मुकाबला लगभग एकतरफा होता नजर आ रहा है।
आरसीए की छह सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए 29 सितंबर को सुबह 11 बजे से मतदान प्रस्तावित है। चुनाव में कुल 38 मतदाता भाग लेंगे, जिनमें जिला क्रिकेट संघों के सचिव, कन्वीनर और पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं।
मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव से पहले ही कई पदों पर निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।