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बीकानेर में बर्फ गिरी, जमीन से निकल रही सिल्लियां

राजस्थान के बीकानेर में शुक्रवार को बर्फ गिरी, किसानों के खड़े खेत, कटी फसलें सब बर्बाद हो गया। किसी का पूरा खेत उजड़ गया तो किसी के खेत में 48 घंटे बाद भी बर्फ जमी है।

जहां किसानों को फसलों की कटाई करनी थी, उन्हें अब मजदूर बुला कर खेत से बर्फ की सिल्लियां निकलवा रहे हैं। किसानों की गेहूं, ईसबगोल और तारामीरा की 100 फीसदी फसलें खराब हो गई हैं।

वहीं पिछले दिनों हुई बारिश से नागौर और बूंदी में भी भारी नुकसान हुआ है। यहां किसी ने किराए पर खेत लिया था तो किसी को बेटी की शादी करनी थी। सारी उम्मीदें धरी की धरी रह गई।

नागौर-बीकानेर में ईसबगोल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। जहां इसका मुनाफा दोगुना मिलना था वहीं अब लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

बीकानेर के लूणकरणसर, अरजनसर और महाजन इलाके में शुक्रवार को ओले गिरे, किसानों के खेतों में बर्फ की चादर बिछ गई। ऐसा दृश्य इससे पहले कभी देखने को नहीं मिला। सड़क बर्फ से अट गई। किसानों ने खेत से निकली बर्फ की सिल्लियां दिखाई। ये भी दिखाया कि अब तक जड़ों में बर्फ जमी है।

अरजनसर के भाजपा नेता और किसान शिव कुमार शर्मा कहते हैं- बीकानेर में गेहूं, इसबगोल और तारामीरा की फसलें खेत में कटाई के लिए पड़ी थी तो कुछ कटी हुई रखी थी। बीकानेर के लूणकरणसर, अरजनसर के किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। मेरे खेत में बर्फ जमी है। इसके पिघलने का इन्तजार कर रहा हूं।

शिव कुमार कहते हैं- लूणकरणसर तहसील के रामसरा, चक असरासर, चक 99 आरडी, चक 103 आरडी, नया खानीसर और चक जोड़ तक फसलें खराब हुई हैं। इसके आगे श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ तक इसका असर हुआ है। सूरतगढ़ के मोकलसर, चक 79, चक 85, चक 92 आरडी और राजियासर गांव की रोही में भी ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। यह पूरा क्षेत्र एक पट्टी के रूप में प्रभावित हुआ है। ये पूरा एरिया करीब 175 किमी का है।

शिव कुमार कहते हैं- मैंने 50 बीघा में गेहूं की फसल उगाई थी। ये कटने को तैयार थी इससे पहले आसमान से बरसी आफत ने पूरा नुकसान कर दिया। मेरी 100 फीसदी फसल खराब हो गई।