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जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से तबाही, राजौरी में फ्लैश फ्लड; पुंछ में 4 की मौत, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

देशभर में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और इसका सबसे ज्यादा असर जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में शनिवार देर रात करीब तीन बजे हुई मूसलाधार बारिश के बाद बादल फटने और फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति ने भारी तबाही मचाई। धारहाल नदी उफान पर आ गई, जिससे न्यू बस स्टैंड बेला इलाके सहित कई निचले क्षेत्रों में पानी भर गया। तेज बहाव में करीब 200 से 250 वाहन बह गए, जबकि कई मकानों और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन, एनडीआरएफ और अन्य राहत एजेंसियां मौके पर पहुंचकर बचाव एवं राहत कार्य में जुटी हैं।

राजौरी में आई इस आपदा के दौरान एक महिला के लापता होने की सूचना है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

उधर, पुंछ जिले में भी रातभर हुई भारी बारिश ने कहर बरपाया। यहां अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के लापता होने की आशंका है। वहीं किश्तवाड़ जिले के डच्छन के सुर्नू इलाके में बादल फटने से घरों, खेतों और स्थानीय बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। कई सड़कें मलबे की चपेट में आने से यातायात प्रभावित हुआ है।

राजौरी में बने गंभीर हालात को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने प्रभावित लोगों की सुरक्षा और राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।

मानसून के दोबारा सक्रिय होने से उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक व्यापक असर देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और केरल में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कर्नाटक और तेलंगाना में तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण केदारनाथ यात्रा भी प्रभावित हुई है। शनिवार को भूस्खलन के बाद यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गईं। वहीं कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पिथौरागढ़ के धारचूला बेस कैंप में 50 तीर्थयात्रियों के चौथे जत्थे को रोक दिया गया है। बेस कैंप के प्रभारी धन सिंह बिष्ट के अनुसार, गरबाधार क्षेत्र में भूस्खलन होने से गुंजी जाने वाला मार्ग बंद हो गया है, जिसके कारण यात्रियों को आगे नहीं भेजा जा सका।

पूर्वोत्तर राज्यों में भी मानसून का असर गंभीर बना हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 29 लोग घायल हुए हैं। राज्य में करीब 1.49 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से 26 जिले, 328 सर्कल और 576 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत शिविरों के माध्यम से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटा है।

गुजरात के सूरत में भी रातभर हुई बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ। शहर के अलथान-पांडेसरा रोड सहित कई निचले इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया। जलभराव के कारण लोगों को पैदल पानी से होकर गुजरना पड़ा और कई स्थानों पर यातायात धीमा हो गया।

राजस्थान में भी मानसून एक बार फिर सक्रिय होने के संकेत हैं। मौसम केंद्र जयपुर ने रविवार के लिए प्रदेश के 15 जिलों में आंधी और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग का कहना है कि पहले पूर्वी राजस्थान और उसके बाद पश्चिमी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बादल फटना ऐसी घटना नहीं है जिसमें बादल वास्तव में फट जाता हो। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक यदि 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में एक घंटे या उससे कम समय में 100 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा दर्ज हो, तो उसे 'बादल फटना' कहा जाता है। यह स्थिति तब बनती है जब नमी से भरी हवाएं, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में, आगे नहीं बढ़ पातीं और एक स्थान पर अत्यधिक नमी जमा हो जाती है। बाद में यही नमी अचानक अत्यधिक तेज बारिश के रूप में बरसती है, जिससे फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी घटनाएं सामने आती हैं।

मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और हालात पर नजर रखी जा रही है।