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महंगे iPhone 18 Pro और Pro Max की डिमांड घटी! Apple ने कंपोनेंट ऑर्डर में 20% तक कटौती की

मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और महंगे मॉडल से बिक्री पर दबाव; 2.99 लाख रुपये वाले फोल्डेबल iPhone Duo की डिमांड पर भी सवाल

Apple के प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने वालों की संख्या कंपनी की उम्मीद से कम रहने के संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के लिए कंपोनेंट ऑर्डर में कटौती की है। Nikkei Asia की रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया गया है कि अक्टूबर के लिए इन दोनों मॉडल के कंपोनेंट ऑर्डर में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक कमी की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतें और नए आईफोन की ऊंची कीमतें मांग पर दबाव डाल रही हैं। इसका असर उन सप्लायर्स पर भी पड़ सकता है, जो इन स्मार्टफोन के लिए अलग-अलग कंपोनेंट तैयार करते हैं। हालांकि, Apple की ओर से आने वाले महीनों में उत्पादन को लेकर क्या फैसला लिया जाएगा, इस बारे में स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

अक्टूबर के ऑर्डर में 15-20% तक कटौती

Nikkei Asia के मुताबिक, Apple ने अक्टूबर के लिए iPhone 18 Pro और Pro Max के कंपोनेंट ऑर्डर शुरुआती अनुमान से कम कर दिए हैं। कुछ सप्लायर्स को इसके चलते अपने उत्पादन की मात्रा घटानी पड़ सकती है।

रिपोर्ट में कंपनी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि फिलहाल मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं है। हालांकि, आने वाले महीनों में बिक्री और ऑर्डर की स्थिति कैसी रहेगी, इस पर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

कंपोनेंट ऑर्डर में कटौती का असर सप्लायर्स पर उनकी उत्पादन क्षमता और पहले से तय डिलीवरी शेड्यूल के आधार पर पड़ेगा। यदि मांग में सुधार नहीं होता है, तो आने वाले समय में उत्पादन और सप्लाई से जुड़े फैसलों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

कीमतों में बढ़ोतरी से ग्राहकों पर दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतें भी स्मार्टफोन बनाने की लागत को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में महंगे प्रीमियम फोन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए कीमत एक महत्वपूर्ण फैसला बन सकती है।

iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये और iPhone 18 Pro Max की कीमत 1,79,900 रुपये बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों मॉडल अपने पिछले वर्जन के मुकाबले 100 डॉलर महंगे हैं।

प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में ऊंची कीमतों के साथ ग्राहकों की अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में अगर ग्राहक नए मॉडल में मिलने वाले फीचर्स और प्रदर्शन को कीमत के अनुरूप नहीं मानते, तो खरीदारी का फैसला टल सकता है। हालांकि, केवल कंपोनेंट ऑर्डर में कटौती से यह तय नहीं होता कि अंतिम बिक्री में कितनी गिरावट आएगी।

2.99 लाख रुपये का फोल्डेबल iPhone भी चर्चा में

Apple के पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo को लेकर भी बिक्री की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी इस डिवाइस को 23 अक्टूबर से 70 देशों और क्षेत्रों में बिक्री के लिए पेश करने की तैयारी कर रही है।

फोन के 256GB मॉडल की शुरुआती कीमत अमेरिका में 1,999 डॉलर और भारत में करीब 2,99,900 रुपये बताई गई है। इतनी ऊंची कीमत इसे आम स्मार्टफोन खरीदारों के बजाय सीमित प्रीमियम ग्राहक वर्ग तक पहुंचा सकती है।

फोल्डेबल स्मार्टफोन सामान्य फोन के मुकाबले तकनीकी रूप से अधिक जटिल होते हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाली मुड़ने वाली स्क्रीन, हिंज और अन्य हिस्सों को टिकाऊ बनाने के लिए अतिरिक्त इंजीनियरिंग और गुणवत्ता जांच की जरूरत होती है। Apple के सख्त क्वालिटी मानकों के चलते इनका उत्पादन भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, iPhone 18 Pro और Pro Max के कंपोनेंट ऑर्डर में कटौती के आधार पर यह कहना अभी संभव नहीं है कि iPhone Duo की बिक्री भी कमजोर रहेगी। इसकी वास्तविक मांग का आकलन बिक्री शुरू होने और शुरुआती आंकड़े सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

क्या Apple की प्रीमियम रणनीति के सामने चुनौती?

Apple के लिए प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में ऊंची कीमत बनाए रखना उसकी कारोबारी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन मेमोरी चिप की लागत बढ़ने और फोन की कीमतों में इजाफे के बीच कंपनी को मांग और उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

यदि ग्राहकों की खरीदारी उम्मीद से कम रहती है, तो कंपोनेंट ऑर्डर और उत्पादन योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। इसका असर सप्लायर्स के कामकाज और डिलीवरी शेड्यूल पर भी दिख सकता है।

फिलहाल रिपोर्ट में अक्टूबर के ऑर्डर में कटौती की बात सामने आई है, लेकिन नवंबर और उसके बाद उत्पादन में और कमी होगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इसी तरह, करीब तीन लाख रुपये की शुरुआती कीमत वाले फोल्डेबल iPhone की बिक्री को लेकर भी वास्तविक तस्वीर लॉन्च और बाजार में उपलब्धता के बाद ही सामने आएगी।

कुल मिलाकर, Apple के सामने चुनौती सिर्फ नए फीचर्स वाले फोन पेश करने की नहीं, बल्कि उनकी कीमत को ग्राहकों की खरीदने की क्षमता और अपेक्षाओं के अनुरूप बनाए रखने की भी है।