दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम पहुंच गए हैं। उनके साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच BRICS देशों ने संयुक्त बयान जारी करने पर आम सहमति बना ली है। ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे सदस्य देशों के विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग रुख होने के बावजूद भारत ने मध्यस्थता करते हुए सर्वसम्मति बनाने में अहम भूमिका निभाई। यह संयुक्त बयान आज ही जारी किया जाएगा।
गलवान झड़प के बाद शी जिनपिंग का पहला भारत दौरा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। पालम एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। जून 2020 की गलवान झड़प के बाद जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। BRICS समिट के सत्रों में भाग लेने के बाद आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होगी।
तनाव के बावजूद भारत-चीन व्यापार में भारी उछाल
15 जून 2020 की गलवान सीमा घटना के बाद भारत-चीन के कूटनीतिक संबंधों में खटास आई, लेकिन व्यापारिक गतिविधियों पर इसका असर नहीं पड़ा। वित्तीय वर्ष 2020-21 में चीन से भारत का आयात लगभग 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। यानी गलवान झड़प के बाद से चीन से भारत का आयात दोगुने से भी अधिक बढ़ चुका है
डॉलर पर निर्भरता घटाने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम जोड़ने पर जोर
BRICS देश अब आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर के इस्तेमाल को सीमित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इसके तहत सदस्य देश अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि BRICS की अपनी कोई साझा करेंसी या एकीकृत पेमेंट सिस्टम नहीं है, फिर भी विभिन्न देशों के ऑनलाइन पेमेंट नेटवर्क को आपस में जोड़ने पर काम जारी है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे इस समिट में अपनी करेंसी में व्यापार और डिजिटल पेमेंट सिस्टम तथा डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने के प्रस्ताव को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन आसान हो सकें।