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डीग पुलिस का ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’: दिल्ली में हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 64 गिरफ्तार

डीग। राजस्थान में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत डीग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली में चल रहे एक हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर स्थित तीन मंजिला इमारत में छापेमारी कर 31 युवकों और 33 युवतियों समेत कुल 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से दो नाबालिगों को भी रेस्क्यू कराया गया है।

पुलिस के अनुसार यह गिरोह खुद को एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी बताकर राजस्थान के लोगों को फोन करता था और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी सुविधाओं के नाम पर उनसे गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर साइबर ठगी करता था।

88 मोबाइल और फर्जी बैंक आईडी कार्ड बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 88 एंड्रॉयड स्मार्टफोन, एक्सिस बैंक, यस बैंक और एचडीएफसी बैंक के फर्जी आईडी कार्ड समेत आम लोगों का बड़ी मात्रा में गोपनीय बैंकिंग डेटा जब्त किया है।

पुलिस के मुताबिक कॉल सेंटर में बाकायदा कर्मचारियों के लिए स्क्रिप्ट तैयार की गई थी। टेलीकॉलर्स उसी स्क्रिप्ट के आधार पर ग्राहकों से बातचीत करते थे और इस तरह उन्हें विश्वास में लेकर बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी हासिल करते थे।

क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का देते थे झांसा

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य फोन पर खुद को बैंक का सीनियर अधिकारी बताते थे। इसके बाद ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कार्ड रिन्यू कराने या बैंकिंग सुविधा अपडेट करने का झांसा दिया जाता था।

बातचीत के दौरान ग्राहक से उसका OTP, CVV, PAN कार्ड की जानकारी, जन्मतिथि और Gmail ID जैसी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर ली जाती थी। जानकारी मिलते ही आरोपी साइबर ठगी को अंजाम देते और पीड़ित के बैंक खाते से रकम निकाल लेते थे।

बैंक मैनेजर की शिकायत से खुला मामला

पूरे साइबर सिंडिकेट का खुलासा एक्सिस बैंक डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने साइबर क्राइम थाना डीग में शिकायत देकर बताया था कि कुछ अज्ञात लोग बैंक के नाम, लोगो और प्रतिष्ठा का गलत इस्तेमाल कर फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से ग्राहकों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस आजमगढ़ निवासी आकाश तक पहुंची। इसके बाद दिल्ली के उत्तम नगर में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर की जानकारी सामने आई।

तीन मंजिला मकान में चल रहा था ठगी का कारोबार

पुलिस के अनुसार गिरोह ने उत्तम नगर में तीन मंजिला मकान किराए पर ले रखा था। इसी इमारत से राजस्थान के मोबाइल नंबरों को टारगेट कर कॉल की जाती थीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कामां दिनेश यादव के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने गोपनीय तरीके से दिल्ली पहुंचकर कॉल सेंटर पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान वहां 85 लोग काम करते हुए मिले।

पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने 64 लोगों को मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया, जबकि 19 लोगों को हिदायत देकर उनके परिजनों के साथ भेज दिया गया।

जॉब पोर्टल से बेरोजगार युवाओं का डेटा निकालते थे

जांच में गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ‘वर्क इंडिया’ जैसे जॉब पोर्टल्स से बेरोजगार युवाओं के रिज्यूमे हासिल करते थे। इसके बाद उन्हें 11 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर कॉल सेंटर में नौकरी दी जाती थी।

कॉल सेंटर में बाकायदा इंटरव्यू और ट्रेनिंग की व्यवस्था थी। कर्मचारियों के लिए टीम लीडर बनाए गए थे और उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों को फोन कर ठगी करने पर अतिरिक्त इंसेंटिव और कमीशन दिया जाता था।

पुलिस के अनुसार गिरोह ने इस अवैध गतिविधि में 18 वर्ष से कम उम्र के दो नाबालिगों को भी शामिल कर रखा था, जिन्हें कार्रवाई के दौरान रेस्क्यू कराया गया।

हर ग्राहक के सवाल का जवाब स्क्रिप्ट में तैयार

छापेमारी के दौरान पुलिस को कई पन्नों में लिखी स्क्रिप्ट भी मिली है। इन स्क्रिप्ट में संभावित ग्राहकों के सवालों और उनके जवाब पहले से तैयार किए गए थे। टेलीकॉलर्स इन्हीं जवाबों के आधार पर बातचीत करते थे, ताकि ग्राहक को कॉल फर्जी होने का शक न हो।

इस तरीके से आरोपी बैंक अधिकारी होने का भरोसा पैदा करते और धीरे-धीरे ग्राहक से ऐसी जानकारी हासिल कर लेते थे, जिसका इस्तेमाल बैंक खाते से रकम निकालने के लिए किया जा सकता था।

फर्जी सिम से करोड़ों के लेनदेन का शक

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह द्वारा एक ही फर्जी पहचान पत्र पर कई सिम कार्ड संचालित किए जा रहे थे। पुलिस को अब तक की जांच में गिरोह के जरिए करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन किए जाने की जानकारी मिली है।

फिलहाल पुलिस जब्त किए गए मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग डेटा और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। इससे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और साइबर ठगी के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

आगे की जांच जारी

डीग पुलिस के साइबर क्राइम थाना के पुलिस उपाधीक्षक वीरेंद्र पाल पूरे मामले की विस्तृत कानूनी जांच कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है।

दिल्ली में बैठे आरोपियों द्वारा राजस्थान के लोगों को निशाना बनाकर चलाए जा रहे इस साइबर नेटवर्क के खुलासे को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत हुई इस कार्रवाई से साइबर ठगी के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर बड़ा प्रहार हुआ है।