हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मासूम की मौत से गुस्साए परिजन शव को घर के बाहर रखकर धरने पर बैठ गए। परिजनों का आरोप है कि जिस नाले में बच्ची गिरी, उसे बंद करने और सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग कई बार पंचायत प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से की गई थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
हमीरपुर निवासी अरबाज खान ने बताया कि उनकी इकलौती बेटी अनाबिया रविवार शाम करीब 5.45 बजे घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान वह मकान के पास से गुजर रहे खुले नाले में जा गिरी। नाला करीब 5 फीट गहरा बताया जा रहा है।
बच्ची के नाले में गिरते ही परिवार और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। लोगों ने किसी तरह उसे बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल लेकर गए। हालांकि डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
परिवार के लिए सबसे बड़ा सदमा यह है कि अनाबिया उनकी इकलौती बेटी थी। मासूम की मौत के बाद गांव में भी शोक का माहौल है।
बच्ची के पिता अरबाज खान ने आरोप लगाया कि खुले नाले को बंद कराने के लिए पहले भी पंचायत प्रशासन को कई बार शिकायत दी गई थी। उनका कहना है कि नाले की स्थिति को लेकर नायब तहसीलदार समेत संबंधित अधिकारियों को भी जानकारी दी गई थी।
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते नाले को बंद कर दिया जाता या उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था की जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, हादसे की जानकारी रविवार शाम को ही पंचायत और तहसील प्रशासन को दे दी गई थी। इसके बावजूद सोमवार सुबह करीब 10 बजे तक कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचा। इससे परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई।
मासूम की मौत के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया और घर के बाहर शव रखकर धरना शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों को लेकर ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।
करीब 16 घंटे तक परिवार और ग्रामीण शव के साथ धरने पर बैठे रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उनके समर्थन में मौके पर जुटे रहे। ग्रामीणों ने खुले नाले की समस्या को लेकर प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की।
धरने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया। टोंक तहसीलदार और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। अधिकारियों ने परिवार को समझाने का प्रयास किया और उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
प्रशासन की समझाइश और चार मांगों पर सहमति बनने के बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद शव के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में खुले नाले और जलनिकासी के ऐसे स्थान हादसों का कारण बन सकते हैं। खासकर बच्चों के लिए खुले और गहरे नाले गंभीर खतरा बने हुए हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि ऐसे सभी खुले नालों की पहचान कर उन्हें ढका जाए और जरूरत वाली जगहों पर सुरक्षा दीवार या बैरिकेडिंग लगाई जाए।
हमीरपुर की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद यदि प्रशासन समय पर कार्रवाई करता तो शायद दो साल की मासूम अनाबिया आज जिंदा होती।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की ओर से किए गए वादों पर है। लोगों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन देने के बजाय खुले नाले को स्थायी रूप से बंद कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी दर्दनाक घटना का सामना न करना पड़े।