पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता आरसी चौधरी का बेटा साहिल चौधरी भी शामिल है। उसके साथ हरियाणा के रोहतक निवासी अंशुल, प्रियांशु और आकाश को भी पकड़ा गया है।
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जयपुर में लग्जरी गाड़ियों के जरिए नकली नोटों की बड़ी खेप पहुंचाई जा रही है। सूचना के आधार पर शुक्रवार देर रात संदिग्ध वाहनों की चेकिंग शुरू की गई।
नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने एक फॉर्च्यूनर और एक स्कॉर्पियो को रोककर तलाशी ली। तलाशी में 500 रुपये के बड़ी संख्या में जाली नोट मिले। इसके बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले से जुड़े नेटवर्क की जानकारी दी। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार जाली नोटों की प्रिंटिंग बांग्लादेश की राजधानी ढाका में की गई थी।
इसके बाद अवैध रास्तों के जरिए नोटों की खेप पश्चिम बंगाल पहुंचाई गई। वहां से कोलकाता और फिर हरियाणा के रोहतक के रास्ते इसे जयपुर लाया गया।
पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क का मुख्य सरगना रोहतक निवासी अमन राणा बताया जा रहा है। पुलिस अब उसके साथ जुड़े अन्य लोगों और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।
पूछताछ में पुलिस के सामने कथित तौर पर जाली नोटों के कारोबार का एक चौंकाने वाला तरीका भी सामने आया है। गिरोह 1 लाख रुपये के असली नोट के बदले 5 लाख रुपये के नकली नोट देने की डील करता था।
पुलिस को आशंका है कि आगामी नगर निकाय चुनावों को देखते हुए इस जाली करेंसी को राजस्थान में खपाने की तैयारी थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली नोटों की खेप किन लोगों तक पहुंचाई जानी थी।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि जाली नोटों का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों के दौरान किया जाना था या नहीं। इसके लिए पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी खंगाल रही है।
साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क से राजस्थान के अलावा दूसरे राज्यों में कितने लोग जुड़े हुए हैं।
जाली नोटों का कनेक्शन बांग्लादेश से सामने आने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ढाका से नकली करेंसी भारत तक किस रास्ते से पहुंचाई गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं।
जयपुर पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाकर अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और जांच आगे बढ़ने के साथ इस गिरोह से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं।