राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 25 वर्षीय प्रसूता की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पहली संतान को जन्म देने वाली अंजली सैनी की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना के विरोध में बड़ी संख्या में लोग मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) के बाहर धरने पर बैठ गए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, मृतका के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने, मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश का प्रयास किया, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर अड़े रहे।
जानकारी के अनुसार, खादरा गांव निवासी अंजली सैनी की शादी फरवरी 2024 में राजकुमार सैनी से हुई थी। 12 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर उसे नीमकाथाना के नव निर्मित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। 14 जुलाई को सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अंजली को लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। इसकी सूचना कई बार अस्पताल स्टाफ को दी गई, लेकिन समय पर प्रभावी उपचार नहीं मिलने के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई। बाद में उसे हायर सेंटर रेफर किया गया, जहां चौमू स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान देर रात उसकी मौत हो गई।
अंजली की मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए और धरना शुरू कर दिया। धरने में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता एवं कामरेड गोपाल सैनी ने कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर उचित उपचार मिल जाता तो प्रसूता की जान बचाई जा सकती थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक ने अस्पताल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वहीं, नीमकाथाना जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. कमल सिंह शेखावत ने छह डॉक्टरों की जांच समिति गठित कर जांच शुरू करा दी है।
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। पीएमओ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, अंजली सैनी को 12 जुलाई को दोपहर 3:30 बजे भर्ती किया गया था। जांच में हीमोग्लोबिन 9 ग्राम पाए जाने पर उसी दिन एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया। 13 जुलाई को उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और 14 जुलाई को दोपहर 1:37 बजे सफल सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति सामान्य थी, लेकिन दोपहर करीब 3:30 बजे पोस्ट पार्टम हेमरेज (अत्यधिक रक्तस्राव) की स्थिति सामने आई। इसके बाद वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने तत्काल उपचार शुरू किया। आवश्यक चिकित्सा देने के बाद शाम 5 बजे मरीज को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजन उसे चौमू के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूता की मौत चिकित्सा जटिलताओं के कारण हुई या उपचार में किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई। वहीं, प्रशासन के सामने परिजनों और ग्रामीणों के आक्रोश को शांत करने की भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।