एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) प्रशांत कौशिक ने बताया कि पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए शुरू किए गए 'आरोग्य रथ' से जुड़ा है:
कागजों में दौड़ा 'आरोग्य रथ': जांच में सामने आया कि प्रदेशभर में स्वास्थ्य योजनाओं के प्रचार-प्रसार के नाम पर आरोग्य रथ का संचालन केवल कागजों में दिखाया गया था।
फर्जी बिल से भुगतान: फर्जी दावे और फेक बिल तैयार करके सरकार से करीब 1 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान उठा लिया गया।
एसीबी द्वारा शुक्रवार दोपहर विशेष अदालत में पेश की गई चार्जशीट में नामजद आरोपी:
नीरज के. पवन (तत्कालीन डायरेक्टर, NHM)
जोजी वर्गीस (अकाउंटेंट)
दीपा गुप्ता (अतिरिक्त लेखाधिकारी - AAO)
अजीत सोनी (दलाल/बिचौलिया)
सुनील राठौड़ (फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला)
अदालत में सरेंडर: चार्जशीट दाखिल होते ही लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी सुनील राठौड़ ने शुक्रवार दोपहर एसीबी कोर्ट में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया।
एसीबी की गहन जांच में घोटाले की परतों का खुलासा हुआ है:
निदेशक रहते हुआ घोटाला: फर्जीवाड़े के समय आईएएस नीरज के. पवन एनएचएम में बतौर डायरेक्टर तैनात थे। उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) वर्ष 2021 में प्राप्त हुई थी।
कमीशनखोरी का नेटवर्क: दलाल अजीत सोनी ने ठेकेदारों से रिश्वत की मोटी रकम इकट्ठा करने का काम किया था।
फर्जी दस्तावेज तैयार किए: प्रचार-प्रसार का टेंडर सुरेंद्र सिंह की फर्म को मिला था, जिसके लिए आरोपी सुनील राठौड़ ने फर्जी कागजात तैयार कर पेमेंट उठाया था।
जांच पेंडिंग: टेंडर फर्म संचालक सुरेंद्र सिंह के खिलाफ धारा 173(8) के तहत एसीबी ने अभी जांच पेंडिंग रखी है।