चिंताजनक बात यह है कि इस अवधि में साइबर ठगी से लोगों को 2307.26 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि गत वर्ष जिस अवधि में करीब 58 हजार साइबर शिकायतें दर्ज हुई थीं, उसी अवधि में इस वर्ष शिकायतों की संख्या बढ़कर 96 हजार से अधिक पहुंच गई है। यानी शिकायतों में 65 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की तकनीकी कार्रवाई के बावजूद साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। यही वजह है कि कार्रवाई का दायरा बढ़ने के बावजूद अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
राज्य स्तर पर डीजीपी और एडीजीपी साइबर क्राइम द्वारा लगातार मॉनिटरिंग और दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद जिला और थाना स्तर पर इन प्रयासों का अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा। कई मामलों में साइबर अपराधियों के साथ पुलिसकर्मियों की कथित मिलीभगत भी सामने आ चुकी है, जिससे कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
सूत्रों के अनुसार कई बार साइबर ठगी के आरोपियों को पकड़ने के लिए भेजी गई पुलिस टीमें पुख्ता सूचना होने के बावजूद खाली हाथ लौट आती हैं। इससे जांच और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सुझाव दिया है कि साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए भेजी जाने वाली टीमों की निगरानी के लिए अलग से गोपनीय और विश्वसनीय टीम तैनात की जानी चाहिए। यदि किसी जांच में मिलीभगत, लापरवाही या जानबूझकर ढिलाई सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अधिकारियों का मानना है कि इससे जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई करने वाली टीमों पर भी निगरानी बनी रहेगी।
साइबर अपराध के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए राजस्थान पुलिस ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब एक लाख रुपए या उससे अधिक की साइबर ठगी होने पर ई-जीरो एफआईआर दर्ज की जाएगी। पहले यह सीमा 5 लाख रुपए थी।
इस संबंध में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने आदेश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई व्यक्ति 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराता है तो एफआईआर की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी।
एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और सीसीटीएनएस के एकीकरण के बाद यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
अब शिकायत सीधे पुलिस तंत्र तक पहुंचेगी और तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। पहले शिकायत दर्ज होने और एफआईआर होने के बीच काफी समय लग जाता था, जिससे ठगी की रकम रोकने और आरोपियों तक पहुंचने में देरी होती थी।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शिकायत मिलने के तुरंत बाद मामला संबंधित थाने तक पहुंच जाएगा और ई-जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जा सकेगी। इससे साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती "गोल्डन ऑवर" का प्रभावी उपयोग होगा और ठगी की राशि को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ेगी।
हालांकि बढ़ती शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि केवल तकनीकी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस तंत्र में जवाबदेही, जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। राजस्थान में साइबर अपराध की चुनौती लगातार बढ़ रही है और इससे निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है।