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डकैत जगन गुर्जर का पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दी गई मुखाग्नि

धौलपुर: अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में मारे गए कुख्यात डकैत जगन गुर्जर का बुधवार को धौलपुर के डांग क्षेत्र स्थित उसके पैतृक गांव भवुतीपुरा में अंतिम संस्कार संपन्न हो गया है। जगन का शव सुबह करीब साढ़े सात बजे ही गांव पहुंच गया था, लेकिन उसके जेल में बंद भाइयों के पहुंचने के इंतजार में अंत्येष्टि रुकी हुई थी। तीनों भाइयों के श्मशान घाट पहुंचने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

 

STF की सुरक्षा में जेल से लाए गए तीनों भाई

जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उसके तीनों भाइयों को जेल से भारी सुरक्षा के बीच धौलपुर लाया गया। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसटीएफ (STF) और धौलपुर पुलिस की अलग-अलग गाड़ियों में तीनों को लाया गया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और करीब 100 पुलिसकर्मी तीनों भाइयों की सुरक्षा में चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे।

 

छावनी में बदला गांव, 9 थानों की पुलिस रही तैनात

कुख्यात डकैत की अंत्येष्टि के मद्देनजर पूरा भवुतीपुरा गांव छावनी में तब्दील नजर आया। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए मौके पर 9 थानों (सोने का गुर्जा, बाड़ी सदर, बाड़ी कोतवाली, बसई डांग, कंचनपुर, निहालगंज, धौलपुर सदर, राजाखेड़ा और मनिया) की पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। एएसपी श्रवण कुमार और सीओ महेंद्र कुमार खुद मौके पर मौजूद रहकर चप्पे-चप्पे की निगरानी कर रहे थे।

 

जेल में तौलिए से गला दबाकर हत्या का आरोप

उल्लेखनीय है कि 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों का सीधा आरोप है कि भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने बैरक के अंदर तौलिए से गला दबाकर जगन की हत्या की है। दोनों हार्डकोर बंदी एक ही बैरक में बंद थे। इस घटना के बाद परिजन अजमेर में धरने पर बैठ गए थे। मंगलवार को प्रशासन के साथ सहमति बनने के बाद ही शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा सका था।

 

पूर्व प्रधान बोले- 'यह जेल प्रशासन का बड़ा फेलियर'

अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे बाड़ी के पूर्व प्रधान पूरण सिंह ने इस पूरी घटना पर जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर इस तरह की वारदात होना बेहद अजीब और गंभीर है। यह पूरी तरह से जेल प्रशासन का फेलियर है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर सजा दी जानी चाहिए।"

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