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E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने का कोई सबूत नहीं: सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी, 23 करोड़ से अधिक वाहनों के डेटा का हवाला

नई दिल्ली। देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 फ्यूल) के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन खराब होने या गाड़ियों के अचानक बंद हो जाने की आशंकाओं को लेकर सरकार ने राज्यसभा में स्थिति स्पष्ट की है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सदन में लिखित जवाब देते हुए कहा कि अब तक E20 फ्यूल की वजह से इंजन फेल होने या बड़े पैमाने पर वाहन खराब होने का कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में बताया कि यह निष्कर्ष देशभर में चल रहे 23 करोड़ से अधिक वाहनों के उपयोग के अनुभव, सर्विस रिकॉर्ड और विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर निकाला गया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों और तकनीकी विश्लेषण में कहीं भी यह साबित नहीं हुआ कि E20 पेट्रोल इंजन को नुकसान पहुंचा रहा है।

23 करोड़ से अधिक वाहनों का अनुभव

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की भी है जिन्हें E20 सर्टिफिकेशन लागू होने से पहले बनाया गया था।

सरकार के अनुसार इन पुराने वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड और संचालन संबंधी आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। इसके बावजूद कहीं भी यह प्रमाणित नहीं हुआ कि E20 फ्यूल के कारण इंजन फेल हुआ हो या किसी बड़े स्तर पर वाहन ब्रेकडाउन की समस्या सामने आई हो।

वैज्ञानिक अध्ययन के बाद लिया गया फैसला

सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में E20 फ्यूल लागू करने का निर्णय अचानक नहीं लिया गया। इसके पीछे कई वर्षों तक किए गए वैज्ञानिक अध्ययन, परीक्षण और विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श शामिल रहा।

सदन में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी केवल 1.53 प्रतिशत थी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से ब्लेंडिंग बढ़ाई गई और वैज्ञानिक परीक्षणों, ऑटोमोबाइल उद्योग तथा संबंधित एजेंसियों से परामर्श के बाद इसे वर्ष 2025-26 तक 20 प्रतिशत यानी E20 स्तर तक पहुंचाया गया।

सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में वाहनों की तकनीकी अनुकूलता और उपभोक्ताओं के हितों का विशेष ध्यान रखा गया।

ऑटो कंपनियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी नहीं मिला नुकसान

राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार देश की एक प्रमुख चारपहिया वाहन निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। इनमें करीब 1.5 करोड़ ऐसे वाहन शामिल थे जिन्हें E20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया था।

सरकार ने बताया कि इन पुराने वाहनों के विस्तृत सर्विस रिकॉर्ड की समीक्षा के बावजूद E20 पेट्रोल के कारण इंजन खराब होने या किसी विशेष तकनीकी नुकसान की एक भी पुष्टि नहीं हुई।

इसी तरह देश की एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी के सर्विस डेटा का भी विश्लेषण किया गया। सरकार के अनुसार पहले इस्तेमाल होने वाले कम एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और E20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों के बीच खराबी के मामलों में कोई महत्वपूर्ण अंतर दर्ज नहीं किया गया।

सरकार ने अफवाहों पर दिया जवाब

हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जाती रही हैं। कुछ लोगों ने दावा किया था कि इससे इंजन जल्दी खराब हो सकता है या वाहन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

सरकार ने राज्यसभा में कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण, करोड़ों वाहनों के संचालन संबंधी आंकड़े और ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस रिकॉर्ड इन दावों की पुष्टि नहीं करते। फिलहाल ऐसा कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि E20 फ्यूल इंजन को नुकसान पहुंचा रहा है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग का उद्देश्य

सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण में कमी लाना और गन्ना किसानों सहित कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना है। इसी रणनीति के तहत देश में चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग बढ़ाया गया है।

सरकार का कहना है कि अब तक उपलब्ध आंकड़ों और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर E20 फ्यूल सुरक्षित है तथा इसके कारण इंजन खराब होने या बड़े स्तर पर वाहन बंद पड़ने जैसी आशंकाओं की पुष्टि नहीं हुई है।