रंजीत नगर निवासी मीरा बंसल के परिवार का कहना है कि उन्होंने दिसंबर 2024 में श्रद्धा के साथ मंदिर में एक हीरा दान किया था। परिवार के अनुसार उस समय मंदिर के पुजारी मनोज भारद्वाज को हीरा सौंपा गया था, जिसे भगवान बिहारी जी की प्रतिमा की नाक के नीचे लॉन्ग के रूप में लगाया गया था।
मीरा बंसल की बहू कृपाली बंसल ने बताया कि करीब छह महीने बाद जब वे मंदिर पहुंचीं तो कई श्रद्धालुओं ने उन्हें बताया कि प्रतिमा पर लगा पत्थर पहले जैसा नहीं दिख रहा। उनका कहना है कि हीरे जैसी चमक और आभा दिखाई नहीं दे रही थी, जिससे उन्हें संदेह हुआ कि असली हीरे की जगह कांच का टुकड़ा लगा दिया गया है।
परिवार का आरोप है कि उन्होंने कई बार देवस्थान विभाग से दान किए गए हीरे की रसीद (स्लिप) मांगी, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना है कि विभाग की ओर से यहां तक कहा गया कि यह भी संभव है कि उन्होंने हीरे की बजाय कांच का टुकड़ा ही चढ़ाया हो। इस जवाब से परिवार संतुष्ट नहीं है और लगातार मामले की जांच की मांग कर रहा है।
कृपाली बंसल के अनुसार इस संबंध में देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा से भी संपर्क किया गया, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इसके बाद परिवार ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भरतपुर विधायक सुभाष गर्ग को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दान किए गए आभूषण का सत्यापन करवाने की मांग की है।
वहीं, देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा ने कहा कि जिस समय कथित रूप से हीरा दान किया गया था, उस समय वे संबंधित पद पर तैनात नहीं थे। उन्होंने कहा कि इस समय वे यह नहीं कह सकते कि प्रतिमा पर लगा पत्थर हीरा है या कांच का टुकड़ा। मामले की तथ्यात्मक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल यह मामला श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। परिवार ने मांग की है कि मंदिर में चढ़ाए गए आभूषणों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए और विशेषज्ञों से प्रतिमा पर लगे पत्थर की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।