अलवर: अलवर की एडीजे कोर्ट नंबर-3 ने बुधवार को एक पिता को अपने ही बेटे की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषी पिता मामचंद, जो सीआरपीएफ में कॉन्स्टेबल रह चुका है, उसने साल 2020 में इस वारदात को अंजाम दिया था।
सरकारी वकील अजीत यादव के अनुसार, कोर्ट ने मालाखेड़ा निवासी 38 वर्षीय मामचंद को बेटे कुनाल की हत्या का दोषी पाया है。
सजा: अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई。
आर्थिक दंड: दोषी पर 1 लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है。
आरोपी का बैकग्राउंड: आरोपी सीआरपीएफ में कॉन्स्टेबल था और उसने जनवरी 2026 में ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली थी。
बच्चे के नाना जगदीश प्रसाद (निवासी फरीदाबाद) ने कोर्ट और पुलिस के सामने बेहद गंभीर खुलासे किए。
बेटी की हत्या का दावा: नाना का आरोप है कि मामचंद ने घटना से दो महीने पहले अपनी पत्नी (कुनाल की मां) रेखा को भी जहर देकर मार दिया था, लेकिन तब ग्रामीणों की समझाइश पर मामला दर्ज नहीं कराया गया था。
बेटियों को भी मारने की कोशिश: आरोप है कि आरोपी ने अपनी दो बेटियों, डॉली और सोनाक्षी को भी भर्तृहरि क्षेत्र में ले जाकर मारने का प्रयास किया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया。
मकसद: नाना के अनुसार, आरोपी अपनी मृत पत्नी की हर निशानी को खत्म करना चाहता था。
मामला 19 अगस्त 2020 का है, जब कुनाल की मौत हुई थी。 बच्चे की मौत के बाद नाना ने मालाखेड़ा थाने में दामाद के खिलाफ जहर देकर हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी。 पुलिस ने पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया था。
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी को सजा दिलाने के लिए मजबूत पैरवी की:
साक्ष्य: कोर्ट के समक्ष 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
दस्तावेज: कुल 26 दस्तावेजी सबूत पेश किए गए। इन सभी तथ्यों और सबूतों का विश्लेषण करने के बाद अदालत ने पिता को अपने ही बच्चे का कातिल करार दिया。