जयपुर/दिल्ली: राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी की टीम ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद टीम उन्हें लेकर जयपुर मुख्यालय पहुँची है, जहाँ उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल के खिलाफ जेजेएम घोटाले में कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी था। वे काफी समय से जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर थे।
पूछताछ: एसीबी मुख्यालय में डीआईजी ओमप्रकाश मीणा खुद सुबोध अग्रवाल से इस घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर सवाल-जवाब कर रहे हैं।
कड़ी निगरानी: दिल्ली से जयपुर लाने के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
इस पूरे मामले की नींव 17 फरवरी को पड़ी थी, जब एसीबी ने एक साथ देशभर में 15 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
छापेमारी का दायरा: जयपुर, बाड़मेर, जालौर, सीकर के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली में भी रेड डाली गई थी।
अग्रवाल पर शिकंजा: 17 फरवरी को ही सुबोध अग्रवाल के आवास पर छापेमारी हुई थी। इसके अगले दिन यानी 18 फरवरी को उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था ताकि वे देश छोड़कर न भाग सकें।
एसीबी की जांच में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपए के कार्यों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं:
वित्तीय धोखाधड़ी: टेंडर प्रक्रिया में चहेती कंपनियों को फायदा पहुँचाने और फर्जी बिलों के जरिए भुगतान उठाने का मामला सामने आया है।
भ्रष्टाचार का जाल: जांच में यह पाया गया कि घटिया पाइपों की सप्लाई और बिना काम किए ही कागजों में करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
इस घोटाले की आंच जलदाय विभाग के कई शीर्ष अधिकारियों तक पहुँची है। सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी से पहले ही एसीबी ने विभाग के 9 अन्य अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इन अधिकारियों से हुई पूछताछ के बाद सुबोध अग्रवाल की भूमिका इस घोटाले में और अधिक स्पष्ट हुई, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की रणनीति तैयार की गई।
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुँचाना है। राजस्थान में इस योजना में हुए इतने बड़े स्तर के घोटाले और एक पूर्व आईएएस की गिरफ्तारी ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। माना जा रहा है कि सुबोध अग्रवाल से पूछताछ में कई अन्य रसूखदार नामों का खुलासा हो सकता है।