एसीबी के अधिकारी सुबह 10:35 बजे संजय बड़ाया को लेकर अदालत पहुंचे। जांच एजेंसी ने दलील दी कि पूछताछ में कई नए तथ्य सामने आए हैं, जिनकी तस्दीक के लिए आरोपी का तीन दिन का और रिमांड आवश्यक है।
बचाव पक्ष की दलील: आरोपी के वकील ने रिमांड बढ़ाने का विरोध किया और उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की अपील की।
कोर्ट का फैसला: दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोपहर करीब 12 बजे कोर्ट ने बड़ाया को जेल भेजने के आदेश जारी कर दिए।
गौरतलब है कि संजय बड़ाया काफी समय से विदेश में थे। सोमवार, 11 मई को जैसे ही वे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें जयपुर लाया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 13 मई तक के लिए एसीबी रिमांड पर सौंपा था। आज रिमांड अवधि पूरी होने पर उन्हें जेल भेज दिया गया।
अदालत परिसर में पेशी के दौरान संजय बड़ाया के साथ उनकी पत्नी भी मौजूद रहीं। इस दौरान माहौल काफी गहमागहमी वाला रहा:
चेहरा छिपाया: कोर्ट से जेल ले जाने तक बड़ाया मीडिया के कैमरों से बचते दिखे और अपना चेहरा छिपाए रखा।
सवालों पर चुप्पी: घोटाले और पूर्व मंत्री के साथ संबंधों को लेकर मीडिया द्वारा पूछे गए किसी भी सवाल का बड़ाया ने कोई जवाब नहीं दिया।
संजय बड़ाया पर आरोप है कि उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत गणपति और श्याम ट्यूबवैल कंपनियों को टेंडर दिलाने के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाई और करोड़ों रुपए की रिश्वत के लेन-देन में शामिल रहे। एसीबी अब तक की पूछताछ में पूर्व मंत्री और अधिकारियों के साथ उनके संबंधों की कड़ियां जोड़ रही है।
अब न्यायिक अभिरक्षा में जाने के बाद एसीबी जेल में उनसे अनुमति लेकर पूछताछ कर सकती है या अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद दोबारा आमना-सामना करवाने की प्रक्रिया अपना सकती है।