जयपुर: राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में गिरफ्तार पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को शुक्रवार को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सुबोध अग्रवाल को 3 दिन की एसीबी रिमांड पर भेजने के आदेश दिए हैं। हालांकि, एसीबी ने पूछताछ के लिए 5 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 3 दिन की मोहलत दी।
पेशी के दौरान सुबोध अग्रवाल के तेवर थोड़े अलग नजर आए। जब उनसे सरेंडर को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा:
स्वेच्छा से आगमन: "न तो मैंने सरेंडर किया है और न ही मुझे पकड़ कर लाया गया है। मैं अपनी इच्छा से जांच में सहयोग करने के लिए आया हूं।"
न्याय पर भरोसा: उन्होंने आगे कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और "सत्यमेव जयते" के नारे के साथ अपनी बात समाप्त की।
एसीबी के अधिकारियों ने रिमांड की आवश्यकता जताते हुए कोर्ट में कड़े तर्क पेश किए:
बड़ा नेटवर्क: एसीबी ने कहा कि यह घोटाला बहुत बड़े स्तर का है, जिसमें करोड़ों रुपयों का अवैध लेनदेन और दस्तावेजों का फर्जीवाड़ा हुआ है।
पूछताछ की जरूरत: घोटाले की तह तक जाने और अन्य कड़ियों को जोड़ने के लिए आरोपी से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करना अनिवार्य है।
सुबोध अग्रवाल के वकीलों ने कोर्ट में गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वकीलों ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रिमांड से पहले अभियुक्त को गिरफ्तारी के ठोस कारण और रिमांड आवेदन की कॉपी देना जरूरी है, जो नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला लंबे समय से लंबित था, तो अब अचानक गिरफ्तारी की क्या आवश्यकता थी?
एसीबी की जांच के अनुसार, सुबोध अग्रवाल पर बेहद गंभीर आरोप हैं:
फर्जी सर्टिफिकेट: उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए और टेंडर की शर्तों में हेरफेर की।
प्रोजेक्ट मंजूरी: पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर करीब 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई।
सुबोध अग्रवाल को पकड़ने के लिए एसीबी ने एक बड़ा अभियान चलाया था।
51 दिन की तलाश: 18 टीमों ने 51 दिनों में 260 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान सुबोध अग्रवाल ने पकड़े जाने से बचने के लिए 10 से ज्यादा ठिकाने बदले।
संपत्ति कुर्की का डर: जब एसीबी ने कोर्ट में संदिग्ध संपत्तियों की सूची दी और कोर्ट ने उन्हें 'भगोड़ा' घोषित कर दिया, तो संपत्ति कुर्क होने के डर से वे अगले ही दिन सामने आ गए।