गौरतलब है कि 4 अप्रैल 2025 को जयपुर बम ब्लास्ट की विशेष अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी सजा के खिलाफ आतंकियों ने हाईकोर्ट में अपील कर राहत की मांग की थी。
जयपुर में 13 मई 2008 को कुल 8 सीरियल धमाके हुए थे, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।
कैजुअल्टी: इन धमाकों में 71 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी और 185 लोग घायल हुए थे。
जिंदा बम: धमाकों के दौरान चांदपोल बाजार स्थित एक गेस्ट हाउस के पास 9वां बम मिला था। इस बम को फटने से ठीक 15 मिनट पहले डिफ्यूज कर दिया गया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया था。
दोनों आतंकियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि धमाकों से जुड़े अन्य 8 मामलों में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें पहले फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने बाद में उन्हें उन मामलों में बरी कर दिया था।
दलील: आतंकियों के वकील ने कहा कि जिंदा बम मिलने के मामले में भी अभियोजन पक्ष ने वही सबूत और तथ्य पेश किए हैं, जिनके आधार पर उन्हें अन्य मामलों में बरी किया जा चुका है।
जमानत की मांग: उन्होंने तर्क दिया कि वे लंबे समय से जेल में हैं और अपील पर सुनवाई में वक्त लगेगा, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाए।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आतंकियों की दलीलों को फिलहाल अपर्याप्त माना और उनकी सजा पर स्टे लगाने या जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट है कि आतंकियों को अपनी अपील के लंबित रहने के दौरान जेल की सलाखों के पीछे ही रहना पड़ेगा。