जानकारी के अनुसार हादसा गुरुवार सुबह करीब 9 बजे मानबाग चौराहे के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रोला तेज गति से गुजर रहा था। इसी दौरान उसके सामने एक ऑटो आ गया। चालक ने ऑटो को बचाने के लिए ट्रोले को मोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वाहन अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराया और फिर सड़क किनारे लगे बिजली ट्रांसफार्मर में जा घुसा।
ट्रांसफार्मर से टकराने के साथ ही तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। धमाका इतना तेज था कि आसपास के घरों और दुकानों में मौजूद लोग घबरा गए और बाहर निकल आए। कुछ देर के लिए पूरे क्षेत्र में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि ट्रांसफार्मर के पास उस समय कोई राहगीर मौजूद नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।
हादसे में ऑटो में सवार धारासिंह और समद आलम घायल हो गए। दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई गई। चिकित्सकों के अनुसार दोनों को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत खतरे से बाहर है।
घटना की सूचना मिलते ही जयसिंहपुरा खोर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रोले को क्रेन की मदद से सड़क किनारे हटवाया, जिसके बाद यातायात को दोबारा सुचारु कराया गया। हादसे के कारण कुछ समय तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
जयसिंहपुरा खोर थाने के एसआई हरिओम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रोला चालक ने ऑटो को बचाने का प्रयास किया था। इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर ट्रांसफार्मर से टकरा गया। उन्होंने बताया कि हादसे में ऑटो सवार दो लोगों को मामूली चोटें आई हैं और किसी भी पक्ष की ओर से अब तक पुलिस में मामला दर्ज नहीं कराया गया है।
इस बीच हादसे को लेकर एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त ट्रोला मानबाग चौराहे के पास स्थित सिंगोदिया एंड कंपनी की दुकान पर सामान लेकर आया था। फर्म से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि ट्रोला उनकी दुकान पर आया था और ट्रांसफार्मर को हुए नुकसान की भरपाई उनकी ओर से कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि नुकसान की राशि जमा कराने की रसीद भी उनके पास उपलब्ध है।
हालांकि इस पूरे मामले में कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल ट्रांसफार्मर के नुकसान की भरपाई कर देने से हादसे की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। दुर्घटना में दो लोग घायल हुए हैं, ऐसे में पुलिस द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज नहीं करना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का मानना है कि यदि सड़क दुर्घटना में लापरवाही सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
गौरतलब है कि जयपुर में पिछले कुछ दिनों से भारी वाहनों से जुड़े सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में 200 फीट बाइपास पर हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के कई लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद अब जयसिंहपुरा खोर की घटना ने एक बार फिर शहर में भारी वाहनों की आवाजाही, तेज रफ्तार और यातायात नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रिहायशी इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए, निर्धारित गति सीमा का कड़ाई से पालन कराया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं।