अलवर: राजस्थान के बहुचर्चित शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी हासिल करने के मामले में एसओजी को बड़ी सफलता मिली है। एसओजी की टीम ने कार्रवाई करते हुए अलवर के गोविंदगढ़ में तैनात शारीरिक शिक्षक राजेश कुमार फागना को धर दबोचा है। आरोपी ने उत्तर प्रदेश की एक यूनिवर्सिटी के पदाधिकारियों के साथ मिलकर बैक-डेट में फर्जी डिग्री तैयार करवाई थी।
एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए बताया:
अनिवार्य योग्यता का अभाव: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में शामिल होने के लिए बी.पी.ई.एड (B.P.Ed) की मार्कशीट और डिग्री होना अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता थी।
बैक-डेट का खेल: आरोपी राजेश कुमार फागणा पुत्र लीलाराम के पास आवेदन करते समय यह योग्यता थी ही नहीं। उसने ऑनलाइन फॉर्म में फर्जी तरीके से खुद को योग्य दिखाया। जब उसका अंतिम चयन हो गया, तो उसने शिक्षा विभाग के सामने बैक-डेट (पुरानी तारीखों) में तैयार करवाई गई बी.पी.ई.एड की फर्जी डिग्री और मार्कशीट पेश कर नौकरी हासिल कर ली।
एसओजी की जांच में सामने आया कि आरोपी राजेश कुमार मूल रूप से कोटपूतली-बहरोड़ जिले के खड़ब स्थित 'फागणों की ढाणी' का रहने वाला है।
दलालों का नेटवर्क: राजेश ने दलाल पंकज जैन और पवन सिंह चौहान के माध्यम से उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद में स्थित जे एस यूनिवर्सिटी (JS University) से संपर्क साधा। वहां से उसने शिक्षा सत्र 2017-19 की बैक-डेटेड फर्जी डिग्री और मार्कशीट मोटी रकम देकर तैयार करवाई।
सरकारी स्कूल में तैनाती: इसी फर्जी दस्तावेज के दम पर आरोपी ने साल 2023 में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, मारकपुर, गोविंदगढ़ (अलवर) में शारीरिक शिक्षक के पद पर सरकारी नियुक्ति भी पा ली और वेतन उठाने लगा।
फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर जयपुर एसओजी थाने में आरोपी शिक्षक, दलालों और जे.एस. विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई थी।
अधिकारियों की मिलीभगत: जांच में पुष्टि हुई कि शिक्षक राजेश कुमार, दलाल पंकज और पी.एस. चौहान ने यूनिवर्सिटी के रसूखदार पदाधिकारियों—सुकेश कुमार और नंदन कुमार मिश्रा के साथ मिलकर इस फर्जी डिग्री को सिस्टम में दर्ज कराया था।
पूर्व में गिरफ्तारियां: अपराध प्रमाणित होने पर एसओजी ने यूनिवर्सिटी के पदाधिकारी सुकेश कुमार और नंदन कुमार मिश्रा को इसी साल 6 मार्च को गिरफ्तार कर 9 मार्च को जेल (न्यायिक अभिरक्षा) भेज दिया था।
यूनिवर्सिटी के अफसरों की गिरफ्तारी के बाद से ही मुख्य आरोपी शिक्षक राजेश कुमार फागणा, दलाल पंकज जैन और पी.एस. चौहान गिरफ्तारी के डर से भूमिगत थे और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे।
जांच अधिकारी को पुख्ता तकनीकी साक्ष्य मिलने के बाद एसओजी की विशेष टीम ने जाल बिछाकर राजेश कुमार फागणा को 17 मई को अल सुबह अलवर से दबोच लिया। आरोपी को कोर्ट में पेश कर एसओजी ने तीन दिन का पुलिस रिमांड (PR) हासिल किया है। रिमांड के दौरान एसओजी आरोपी से दलाल पंकज जैन और पवन सिंह के ठिकानों के बारे में पूछताछ कर रही है, ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों को भी जल्द गिरफ्तार किया जा सके।