इस पहल की सबसे खास बात यह है कि पुलिस ने इन ब्लैक स्पॉट्स के वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए डेटा को Google Maps के साथ इंटीग्रेट किया है। अब वाहन चालक जब इन दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के करीब पहुंचेंगे तो उन्हें मोबाइल स्क्रीन पर पॉप-अप और वॉयस अलर्ट के जरिए पहले ही सावधान किया जाएगा। इसका उद्देश्य चालक को समय रहते वाहन की गति कम करने और अधिक सतर्कता के साथ वाहन चलाने के लिए प्रेरित करना है।
जयपुर रेंज पुलिस ने वर्ष 2023 से 2025 तक के सड़क दुर्घटना आंकड़ों, पुलिस रिकॉर्ड और ट्रैफिक रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया। इस दौरान केवल दुर्घटनाओं की संख्या को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि हादसों में हुई मानव क्षति को सबसे महत्वपूर्ण मानक माना गया।
अध्ययन के बाद जयपुर रेंज के अलग-अलग जिलों में कुल 93 दुर्घटना संभावित स्थानों को चिन्हित किया गया है। इनमें जयपुर ग्रामीण में 28, अलवर में 11, भिवाड़ी में 5, सीकर में 4, खैरथल-तिजारा में 3 और झुंझुनू में 1 स्थान शामिल है।
वाहन चालकों को जोखिम की गंभीरता आसानी से समझाने के लिए इन 93 स्थानों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है।
Red यानी A Type: ऐसे 6 हाई रिस्क जोन चिन्हित किए गए हैं, जहां पिछले तीन वर्षों में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई।
Orange यानी B Type: कुल 30 मीडियम रिस्क जोन हैं। इन स्थानों पर तीन वर्षों के दौरान 10 से 20 लोगों की जान गई।
Yellow यानी C Type: कुल 57 लो रिस्क जोन चिन्हित किए गए हैं, जहां पिछले तीन वर्षों में 5 से 10 लोगों की मौत दर्ज की गई।
इस वर्गीकरण से वाहन चालक अपने रास्ते में आने वाले खतरनाक स्थानों को पहले से पहचान सकेंगे।
जयपुर रेंज पुलिस ने आम लोगों, ट्रांसपोर्टर्स और नियमित रूप से यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए QR Code व्यवस्था भी विकसित की है। स्मार्टफोन से QR कोड स्कैन करने पर Google Maps खुलेगा, जहां अलग-अलग रंगों में दुर्घटना संभावित स्थान दिखाई देंगे।
इस सुविधा का इस्तेमाल यात्रा शुरू करने से पहले किया जा सकता है। चालक अपने पूरे रूट में आने वाले ब्लैक स्पॉट्स की जानकारी पहले ही प्राप्त कर सकेंगे और इन स्थानों पर विशेष सावधानी बरत सकेंगे।
पुलिस के अनुसार, इस तकनीकी व्यवस्था में चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स को Google Maps के नेविगेशन सिस्टम से जोड़ा गया है। जब कोई चालक Google Maps पर नेविगेशन के दौरान किसी चिह्नित दुर्घटना संभावित क्षेत्र के 500 मीटर से 1 किलोमीटर के दायरे में पहुंचेगा, तो उसे रोड सेफ्टी अलर्ट मिल सकेगा।
मोबाइल स्क्रीन पर पॉप-अप के साथ वॉयस अलर्ट के जरिए चालक को संभावित जोखिम की जानकारी दी जाएगी। इससे चालक समय रहते गति कम कर सकता है और आगे अधिक सावधानी से वाहन चला सकता है।
जयपुर रेंज पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह सूची स्थायी नहीं होगी। दुर्घटनाओं के बदलते आंकड़ों के आधार पर हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी। यदि किसी नए स्थान पर हादसों और जनहानि में बढ़ोतरी सामने आती है तो उसे ब्लैक स्पॉट की सूची में शामिल किया जाएगा और Google Maps पर भी डेटा अपडेट किया जाएगा।
पुलिस की इस पहल को डेटा आधारित सड़क सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ दुर्घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले ही वाहन चालकों को चेतावनी देकर संभावित जनहानि को रोकना है।
जयपुर रेंज पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि रोड सेफ्टी अलर्ट मिलने पर ओवरस्पीडिंग से बचें। बाइक चलाते समय हेलमेट और कार में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करें। इसके अलावा ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग न करें और थकान या नींद की स्थिति में वाहन चलाने से बचें।
‘Operation Safer Roads’ के जरिए अब तकनीक और ट्रैफिक डेटा को जोड़कर सड़क हादसों को रोकने की कोशिश की जा रही है। यदि वाहन चालक इन अलर्ट को गंभीरता से लेते हैं तो दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में होने वाली जनहानि को कम करने में यह व्यवस्था अहम भूमिका निभा सकती है।