जयपुर: पेपर लीक प्रकरण की जांच कर रही एसओजी ने सोमवार दोपहर मुख्य आरोपी अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 15 मई तक की रिमांड पर भेज दिया गया है। अब एसओजी राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा और शेर सिंह मीणा को आमने-सामने बिठाकर राज उगलवाएगी।
एसओजी की रिमांड पर फिलहाल तीन मुख्य आरोपी हैं, जिनसे पूछताछ में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है:
अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा: 15 मई तक रिमांड पर।
बाबूलाल कटारा और विजय डामोर: पूर्व आरपीएससी सदस्य और उनका भांजा 13 मई तक एसओजी की कस्टडी में हैं।
जांच का केंद्र: एसओजी यह पता लगाएगी कि पेपर किन-किन अभ्यर्थियों तक पहुंचा और इसके बदले कुल कितनी रकम वसूली गई।
एसओजी की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला सौदा सामने आया है। आरोप है कि आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा ने साल 2022 की स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा का पेपर परीक्षा से पहले ही शेर सिंह मीणा को 60 लाख रुपए में बेच दिया था। इसके अलावा, कटारा ने अपने भांजे विजय डामोर के लिए सामान्य ज्ञान और भूगोल का पेपर भी मुहैया कराया था।
पेपर लीक करने का तरीका बेहद शातिराना था। जांच के अनुसार:
कटारा पेपर तैयार होने के बाद उसे अपने सरकारी आवास पर ले गया।
वहां उसने अपने भांजे विजय डामोर से पूरा पेपर एक रजिस्टर में लिखवाया।
हाथ से लिखा हुआ यह पेपर माफिया शेर सिंह मीणा को सौंपा गया।
शेर सिंह मीणा ने पेपर मिलने के बाद उसकी प्रतियां तैयार कीं और अपने गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाईं:
मुख्य नाम: विनोद रेवाड़, भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका को पेपर की कॉपियां उपलब्ध कराई गईं।
करोड़ों का खेल: इन गुर्गों के जरिए परीक्षा से पहले कई अभ्यर्थियों को पेपर पढ़ाया गया, जिससे गिरोह ने करोड़ों रुपए बटोरे।
एसओजी अब उन अभ्यर्थियों की सूची भी तैयार कर रही है, जिन्होंने शॉर्टकट अपनाकर पेपर खरीदा था। जल्द ही इस मामले में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं।