पुलिस सूत्रों के अनुसार, तीनों आरोपियों के घरों की तलाशी के दौरान नकदी के बंडल, सोने के जेवरात, जिनमें कान की बालियां और लॉकेट शामिल हैं, तथा एक कार बरामद की गई है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस आरोपी के घर से कितनी नकदी और कितना सामान बरामद हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री का मूल्यांकन और सत्यापन किया जा रहा है।
जांच में आर्थिक लेन-देन का बड़ा नेटवर्क भी सामने आया है। पुलिस ने आरोपियों के रिश्तेदारों और करीबी लोगों के करीब 30 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। प्रारंभिक जांच में इन खातों में आय के मुकाबले कहीं अधिक वित्तीय लेन-देन होने की बात सामने आई है। अब इन खातों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि कथित चोरी की रकम के प्रवाह का पता लगाया जा सके।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह और सह-आरोपी अविनाश शुक्ला कथित तौर पर चोरी के पैसों को शेयर बाजार में निवेश करते थे। इसके अलावा रकम को लोगों को ब्याज पर उधार भी दिया जाता था। आरोप है कि धनराशि को रिश्तेदारों और करीबी लोगों के खातों के माध्यम से घुमाया जाता था और बाद में अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था, ताकि रकम के स्रोत को छिपाया जा सके। पुलिस इन दावों का दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही है।
तलाशी के दौरान अनुकल्प मिश्रा के नाम खरीदी गई करीब एक एकड़ जमीन के दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, जमीन की खरीद के समय इसकी कीमत करीब 6.70 लाख रुपये दर्ज की गई थी। हालांकि स्थानीय स्तर पर इस जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य इससे कई गुना अधिक बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जमीन खरीदने में इस्तेमाल की गई धनराशि का स्रोत क्या था।
बुधवार सुबह पुलिस ने तीनों आरोपियों—करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा—को 40 घंटे की रिमांड पर लिया था। पूछताछ के दौरान उनके पास से कथित तौर पर फर्जी चंदा रसीदें भी बरामद हुई हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन रसीदों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और क्या इनके जरिए धन जुटाने या वित्तीय लेन-देन में किसी तरह की अनियमितता की गई।
इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में कहा कि धार्मिक चढ़ावे की चोरी "महापाप" है और आरोप लगाया कि इस मामले में केवल लीपापोती की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जांच के लिए गठित एसआईटी पर भी सवाल उठ रहे हैं और इसकी निष्पक्षता पर चर्चा हो रही है।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में केवल छोटे लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंच रही है।
उधर, अखिलेश यादव के बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को इस तरह के बयान देने से पहले अयोध्या जाकर भगवान राम के दर्शन करने चाहिए। राजभर ने कहा कि जनता उनके बयानों को गंभीरता से नहीं ले रही है और जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही हैं। बैंक खातों, संपत्तियों, निवेश और वित्तीय लेन-देन की जांच के आधार पर मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।