पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर यह शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवती ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया। इसी आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि नोएडा एक्सप्रेसवे थाने में दर्ज की गई FIR जीरो FIR के रूप में दर्ज की गई है। जीरो FIR किसी भी थाना क्षेत्र में दर्ज की जा सकती है, भले ही घटना उस थाने के अधिकार क्षेत्र में न हुई हो। बाद में संबंधित क्षेत्र के थाने को जांच के लिए मामला सौंप दिया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत अब मामले को दिल्ली के पार्लियामेंट थाना भेजा जा रहा है, क्योंकि घटना स्थल जंतर-मंतर दिल्ली में आता है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वायरल वीडियो और उससे जुड़े अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वीडियो पूरा है या किसी तरह से संपादित किया गया है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जाएगी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि युवती की कथित टिप्पणी से सामाजिक वैमनस्य फैलने और शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इसी आधार पर विद्वेष फैलाने और शांति भंग से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने कार्रवाई की मांग की है, जबकि कुछ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की बात कही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल FIR दर्ज होने का मतलब आरोपों की पुष्टि नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान वीडियो की प्रमाणिकता, कार्यक्रम की परिस्थितियों और कथित बयान के पूरे संदर्भ को देखा जाएगा। इसके बाद ही मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी संबंधित साक्ष्यों को जुटाने में लगी हुई है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचें।