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दौसा से चोरी हुई स्कॉर्पियो चित्तौड़गढ़ में बरामद, ईसीएम मशीन से सेंसर फेल कर उड़ाते थे गाड़ियां

दौसा: दौसा के गणेश नगर इलाके से घर के बाहर खड़ी एक महंगी स्कॉर्पियो कार को चुराने वाले शातिर वाहन चोर को पुलिस ने धर दबोचा है। पकड़ा गया आरोपी इतना चालाक था कि उसने पुलिस की नजरों से बचने के लिए कार की नंबर प्लेट बदलने के साथ-साथ उसके मूल रंग पर सफेद पेंट कर हुलिया बदलने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन, दौसा पुलिस की मुस्तैदी और तकनीकी तफ्तीश के आगे उसकी यह सारी चालाकी धरी की धरी रह गई।

 

23 मई को हुई थी वारदात, मेहंदीपुर बालाजी क्षेत्र का चोर गिरफ्तार

पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि वाहन चोरी की यह वारदात इसी साल 23 मई को हुई थी:

  • घर के बाहर से चोरी: गणेश नगर क्षेत्र में रहने वाले सुनील शर्मा की स्कॉर्पियो कार 23 मई को उनके घर के बाहर खड़ी थी, जहां से चोरों ने इसे पार कर दिया। पीड़ित ने तुरंत कोतवाली थाने में इस संबंध में मामला दर्ज करवाया।

  • आरोपी की पहचान: दौसा पुलिस की विशेष टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए चोरी की गई स्कॉर्पियो को चित्तौड़गढ़ से बरामद कर लिया है। इसके साथ ही वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी योगेश मीना को गिरफ्तार किया गया है, जो मेहंदीपुर बालाजी क्षेत्र के नांदरी गांव का रहने वाला है।

 

चोरों को पकड़ने के लिए खंगाले 560 सीसीटीवी कैमरे

इस हाई-टेक चोरी को सुलझाने और आरोपियों के रूट को ट्रेस करने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी:

  • हाईवे और टोल रूट की जांच: जांच के दौरान पुलिस टीमों ने दौसा, बस्सी, कानोता, जयपुर, बगरू और किशनगढ़ सहित कई राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य क्षेत्रों में लगे करीब 360 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला।

  • नेटवर्क खंगालने को बनी अलग टीम: इसके अलावा, चोरी की इस वारदात में चोरों द्वारा इस्तेमाल किए गए अन्य वाहनों के मूवमेंट और उनके पूरे नेटवर्क को समझने के लिए एक अलग टीम गठित की गई। इस टीम ने आरोपियों की गतिविधियों को ट्रेस करने के लिए लगभग 200 अन्य सीसीटीवी कैमरों की कड़ियों को आपस में जोड़ा।

 

'ईसीएम मशीन' के जरिए सेंसर फेल कर देते थे बदमाश

पुलिस पूछताछ में आरोपी योगेश मीना ने वाहन चोरी के जिस तरीके (मोडस ऑपेरंडी) का खुलासा किया है, वह बेहद चौंकाने वाला है:

  • सेंसर सिस्टम ब्लॉक: यह गिरोह आधुनिक तकनीक से लैस है। आरोपी वाहनों में लगी ईसीएम (Engine Control Module) मशीन के जरिए गाड़ी का डिजिटल कोड तोड़ देते थे। ऐसा करने से कार का सेंसर सिस्टम पूरी तरह फेल हो जाता था और लॉक टूटने या गाड़ी स्टार्ट होने पर भी कोई अलर्ट या सायरन की आवाज नहीं होती थी।

  • पहचान बदलने के लिए पेंट: वारदात के बाद आरोपी टोल प्लाजा और पुलिस नाकाबंदी से बचने के लिए मुख्य हाईवे की बजाय ग्रामीण व कच्चे रास्तों का इस्तेमाल करते हुए गाड़ी को सुनसान इलाकों में ले जाते थे। वहां ले जाकर सबसे पहले गाड़ी की नंबर प्लेट बदली जाती थी और पहचान छिपाने के लिए गाड़ी के असली रंग पर नया पेंट कर दिया जाता था।

 

जीजा के साथ शुरू किया था काम, अब अलवर के लड़कों को मिलाकर बनाया खुद का गैंग

आरोपी योगेश मीना का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह संगठित तरीके से अपराध को अंजाम दे रहा था:

  • अपराध का पारिवारिक नेटवर्क: पूछताछ में सामने आया कि योगेश मीना ने शुरुआत में अपने जीजा रिंकू मीना के साथ मिलकर वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम देना शुरू किया था।

  • नया संगठित गिरोह: कुछ समय बाद उसने जीजा से अलग होकर अपना खुद का एक नया और स्वतंत्र गिरोह बना लिया। इस नए गैंग में उसने अलवर और उसके आसपास के इलाकों के शातिर युवकों को शामिल किया और राजस्थान के विभिन्न जिलों में संगठित तरीके से लक्जरी वाहनों की चोरी करना शुरू कर दिया। फिलहाल पुलिस आरोपी से गिरोह के अन्य सदस्यों और पूर्व में की गई अन्य चोरियों के बारे में गहन पूछताछ कर रही है।

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