मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में डोटासरा ने लिखा कि राजस्थान के 75 वर्षों के इतिहास में पहली बार जनता की आवाज इतनी अधिक दबाई जा रही है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में विधानसभा की कार्यवाही और जन मुद्दों पर चर्चा का स्तर लगातार घटा है।
डोटासरा ने लिखा कि आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान 16वीं विधानसभा में अब तक केवल पांच सत्र आयोजित हुए हैं। इन सत्रों में कुल 84 बैठकें हुईं और लगभग 573 घंटे ही सदन की कार्यवाही चली। उनका दावा है कि यह प्रदर्शन राज्य की विधानसभा के इतिहास में सबसे कमजोर कार्यप्रणालियों में शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनप्रतिनिधियों को जनता के मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं दे रही है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच होता है, जहां जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को अपने निर्णयों एवं नीतियों पर जवाब देना चाहिए। लेकिन वर्तमान सरकार में स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार अक्सर चर्चा से बचती है और मंत्रियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाते।
डोटासरा ने भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही तय करने का भी सबसे बड़ा माध्यम है। यदि सदन की कार्यवाही सीमित होगी और जनहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्ष की बात सुननी चाहिए और जनता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर जवाब देना चाहिए। विपक्ष की भूमिका केवल आलोचना करना नहीं बल्कि सरकार का ध्यान जन समस्याओं की ओर आकर्षित करना भी है। ऐसे में यदि सदन में चर्चा का समय कम किया जाता है या महत्वपूर्ण विषयों पर जवाब देने से बचा जाता है तो इससे लोकतंत्र की भावना प्रभावित होती है।
डोटासरा ने अपने बयान में यह भी कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में विधानसभा का महत्व लगातार कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने वाले मंच को महज औपचारिकता तक सीमित कर दिया गया है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है कि विधानसभा नियमित रूप से चले और जनता से जुड़े हर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो।
कांग्रेस नेता ने भाजपा सरकार से विधानसभा की कार्यवाही को अधिक प्रभावी बनाने, बैठकों की संख्या बढ़ाने तथा जनहित के मुद्दों पर पारदर्शी और जवाबदेह रवैया अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती सरकार और विपक्ष दोनों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।
वहीं, इस मामले पर समाचार लिखे जाने तक राज्य सरकार या भाजपा की ओर से डोटासरा के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा की कार्यवाही और जन मुद्दों पर चर्चा को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।