Rajasthan

कोटा में तेल की पैकिंग पर बड़ा खुलासा, वुड प्रेस्ड ऑयल के नाम पर रिफाइंड तेल बेचने का आरोप

कोटा। ‘शुद्ध आहार मिलावट पर वार’ अभियान के तहत कोटा में चिकित्सा विभाग की खाद्य सुरक्षा टीम ने गुरुवार को रंगबाड़ी स्थित एक तेल पैकिंग इकाई पर कार्रवाई की। टीम ने आरोप लगाया कि यहां रिफाइंड राइस ब्रान ऑयल को ‘वुड प्रेस्ड’ या ‘कच्ची घाणी’ तेल के नाम से पैक कर ऑनलाइन बिक्री के लिए तैयार किया जा रहा था।

350 रुपए लीटर में बेचने की तैयारी

सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर के सुपरविजन में टीम ने मुखबिर की सूचना पर 3 सितंबर को कृष्णा नगर स्थित केशव एग्रो इंडस्ट्रीज का औचक निरीक्षण किया। मौके पर अलग-अलग ब्रांड के रिफाइंड तेल के टिन, वुड प्रेस्ड ऑयल के रैपर और पैकिंग बोतलें मिलीं।

अधिकारियों के अनुसार, वहां 15-15 किलो के 40 टिन में कुल 600 किलो रिफाइंड राइस ब्रान ऑयल मिला। इसी तेल को ‘श्री अनन्तम’ ब्रांड के नाम से एक-एक लीटर की बोतलों में पैक कर वुड प्रेस्ड राइस ब्रान ऑयल के तौर पर करीब 350 रुपए प्रति लीटर में ऑनलाइन बेचने के लिए तैयार किया जा रहा था।

मौके पर नहीं मिली घाणी या कोल्हू

खाद्य सुरक्षा टीम को निरीक्षण के दौरान परिसर में किसी तरह की घाणी या कोल्हू संचालित होता नहीं मिला। टीम को वुड प्रेस्ड सरसों, अलसी और तिल्ली तेल भी पैक अवस्था में मिले।

विक्रेता ने इन तेलों को बूंदी स्थित एक तेल मिल से खरीदना बताया, लेकिन निरीक्षण के दौरान खरीद से संबंधित आवश्यक वैध बिल या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

236 पैक्ड बोतलें सीज

कार्रवाई के दौरान रिफाइंड राइस ब्रान ऑयल और पैक की जा रही वुड प्रेस्ड राइस ब्रान ऑयल की बोतलों के नमूने लिए गए। टीम ने 40 टिन और 236 पैक्ड बोतलों को सीज कर दिया। इसके अलावा सरसों, अलसी और तिल्ली तेल के भी नमूने लिए गए हैं।

सभी नमूनों को जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला कोटा भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं संचालक को आगामी आदेश तक संबंधित गतिविधि नहीं करने के लिए पाबंद किया गया है।

दूसरे संस्थान से दही, आटा और नमक के नमूने

खाद्य सुरक्षा टीम ने इंदिरा विहार स्थित मेक्स फूड का भी निरीक्षण किया। यहां से दही, आटा और आयोडाइज्ड नमक के तीन नमूने लिए गए।

निरीक्षण के दौरान फूड हैंडलर्स के मेडिकल और पेस्ट कंट्रोल सर्टिफिकेट भी उपलब्ध नहीं मिले। विभाग की ओर से संस्थान को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 32 के तहत इम्प्रूवमेंट नोटिस दिए जा रहे हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित कमियों को दूर नहीं करने पर संस्थान का लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की जा सकती है।