जवाई बांध पाली जिले की पेयजल जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बांध में पर्याप्त पानी होने पर जालोर और पाली जिले के कमांड एरिया में रबी की फसलों की सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। लेकिन इस बार कम बारिश के कारण बांध में अपेक्षित पानी की आवक नहीं होने से पेयजल और सिंचाई की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
जालोर और पाली जिले में करीब 38 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र जवाई बांध के पानी से सिंचाई पर निर्भर है। हर साल बांध में उपलब्ध जलस्तर और पानी की स्थिति का आकलन करने के बाद कमांड एरिया में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है।
इस बार कम बारिश के चलते बांध में पानी की आवक कम रही। ऐसे में उपलब्ध जल का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर करना जरूरी हो गया है। सबसे पहले पेयजल जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान देना होगा। इसके चलते किसानों को रबी की फसल के लिए नहर से पानी मिलने की उम्मीद कम हो गई है।
जवाई कमांड एरिया में शामिल आहोर क्षेत्र के 24 राजस्व गांवों के किसानों को इस स्थिति का सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है। जवाई बांध के पानी पर निर्भर रहने वाले किसानों को इस बार रबी की बुवाई के लिए सिंचाई का पानी नहीं मिल पाएगा।
सिंचाई की सुविधा नहीं मिलने से किसानों को कुओं, ट्यूबवेल और अन्य वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना होगा, जहां ये उपलब्ध हैं। जिन किसानों के पास वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, उनके लिए बुवाई और फसल को समय पर पानी उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है।
जवाई बांध से पाली जिले की पेयजल योजना जुड़ी हुई है। कम जल उपलब्धता के बीच पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी। ऐसे में सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का निर्णय बांध में उपलब्ध जल और आगामी जरूरतों को ध्यान में रखकर लेना होगा।
कम बारिश के कारण पैदा हुई यह स्थिति जवाई कमांड एरिया के किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। अब किसानों की निगाहें बांध में पानी की उपलब्धता और सिंचाई के लिए आगे होने वाले निर्णयों पर टिकी हैं।