Rajasthan

बाड़मेर में स्कूल गेट पर हंगामा, प्रिंसिपल से धक्का-मुक्की; दीवार फांदकर स्कूल में घुसे, तबादले को लेकर विवाद

बाड़मेर। जिले के नोखड़ा क्षेत्र के आडेल गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को तबादले को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया, जब स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच पहुंचे प्रिंसिपल के साथ धक्का-मुक्की हो गई। इस दौरान एक युवक ने कथित रूप से प्रिंसिपल की कॉलर पकड़कर उन्हें धक्का दे दिया, जिससे वे नीचे गिर पड़े। बाद में प्रिंसिपल स्कूल में प्रवेश के लिए दीवार फांदकर अंदर पहुंचे।

घटना मंगलवार सुबह करीब 11 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार विद्यालय के मुख्य द्वार पर अभिभावकों, ग्रामीणों और कुछ विद्यार्थियों ने ताला लगाकर धरना दे रखा था। प्रदर्शनकारी स्कूल की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रिंसिपल भैराराम थोरी को तत्काल कार्यमुक्त (रिलीव) किए जाने की मांग कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब प्रिंसिपल स्कूल पहुंचे तो उन्होंने गेट की चाबी के बारे में पूछा। जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने पत्थर से मुख्य गेट का ताला तोड़ने का प्रयास किया। इसी दौरान वहां मौजूद एक युवक ने कथित रूप से उनकी कॉलर पकड़कर धक्का दे दिया। इसके बाद मौके पर मौजूद कुछ अन्य लोगों के साथ भी उनकी धक्का-मुक्की हुई। विवाद बढ़ने पर प्रिंसिपल स्कूल की दीवार फांदकर परिसर में प्रवेश कर गए।

सदर थाना प्रभारी देवीचंद ढाका ने बताया कि प्रिंसिपल भैराराम थोरी का करीब सात महीने पहले उदयपुर तबादला हो चुका है। इसके बावजूद वे अब तक कार्यमुक्त नहीं हुए हैं। पुलिस के अनुसार ग्रामीणों और विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रिंसिपल ऑनलाइन ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) जारी नहीं कर रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। इसी कारण ग्रामीण उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

वहीं, नोखड़ा तहसीलदार दिनेश विश्नोई ने बताया कि प्रिंसिपल के तबादले को सात से आठ महीने हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में अदालत से मांगा गया स्थगन (स्टे) भी निरस्त हो चुका है। इसके बावजूद उनके कार्यमुक्त नहीं होने से ग्रामीणों और विद्यार्थियों में नाराजगी है।

दूसरी ओर, प्रिंसिपल भैराराम थोरी ने इन आरोपों को लेकर अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पिछले सात महीनों से उनकी शाला दर्पण आईडी बंद कर रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ अधिकारी ग्रामीणों और विद्यार्थियों को उनके खिलाफ भड़का रहे हैं, जिससे उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

प्रिंसिपल ने कहा कि शाला दर्पण आईडी उनके पास नहीं होने के कारण वे ऑनलाइन टीसी जारी करने सहित कई प्रशासनिक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में 13 शिक्षकों का स्टाफ है और विभाग ने जिस अधिकारी को ऑनलाइन कार्यों की जिम्मेदारी दी है, वही यह प्रक्रिया पूरी कर सकता है। उनका कहना है कि जब सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो रही हैं तो उन्हें भी ऑनलाइन ही कार्यमुक्त किया जाना चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की नजर बनी हुई है। घटना के बाद स्कूल में तनाव का माहौल रहा, हालांकि किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।