जयपुर। राजस्थान के नगर निकाय चुनाव 2026 के नतीजों को लेकर श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने प्रदेश में 2245 निर्दलीय पार्षदों की जीत को सवर्ण समाज और मूल OBC की जातियों में व्याप्त असंतोष का संकेत बताया। मकराना ने कहा कि प्रदेश के कई ऐसे इलाकों में भी निर्दलीय उम्मीदवारों ने बड़ी संख्या में जीत दर्ज की है, जहां भाजपा और कांग्रेस का लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके मुताबिक यह नतीजे जनता के बदलते राजनीतिक मूड की ओर इशारा कर रहे हैं।
मकराना ने मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के गृह क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े राजनीतिक चेहरों के प्रभाव वाले इलाकों में भी पार्टी उम्मीदवारों को चुनौती मिली है। उन्होंने कहा कि सादुलशहर में 25 में से 22, पिलानी में 35 में से 30 और भरतपुर नगर परिषद में 65 में से 36 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई।
उन्होंने मकराना नगरपालिका का भी उदाहरण दिया, जहां उनके अनुसार 36 निर्दलीय, 18 कांग्रेस और 6 भाजपा प्रत्याशी विजयी रहे। जयपुर नगर निगम में 14 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
महिपाल सिंह मकराना ने UGC से जुड़े मुद्दे को लेकर भी सरकार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय लेते हुए मामले में रोलबैक नहीं किया तो सवर्ण समाज और मूल OBC की जातियों के साथ मिलकर आगामी पंचायती राज चुनावों में इससे भी बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया जाएगा।
मकराना के बयान ने निकाय चुनाव के बाद प्रदेश की राजनीति में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। खासतौर पर उन निकायों में जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखे हुए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए मकराना ने कहा कि प्रदेश के शहरी निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल वोटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहा। उनके अनुसार भाजपा को कांग्रेस से 99,615 वोट अधिक मिले।
कुल करीब 1.06 करोड़ मतों में भाजपा को 37.35 लाख, कांग्रेस को 36.35 लाख और निर्दलीय उम्मीदवारों को 29.06 लाख वोट मिले। वहीं नोटा को करीब 1.09 लाख वोट प्राप्त हुए।
अन्य दलों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए बताया गया कि RLP को 1,00,277, आम आदमी पार्टी को 49,829, BAP को 14,150, CPM को 34,170 और BSP को 30,179 वोट मिले।
जयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने वार्डों की संख्या के लिहाज से स्पष्ट बढ़त हासिल की। भाजपा ने 78 वार्डों में जीत दर्ज की और बहुमत का आंकड़ा पार किया। हालांकि कुल वोटों की बात करें तो कांग्रेस भाजपा से आगे रही।
आंकड़ों के मुताबिक जयपुर नगर निगम क्षेत्र में भाजपा को 5,52,713 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 5,65,848 वोट हासिल हुए। यानी कांग्रेस को भाजपा से 13,135 अधिक वोट मिले। वहीं दोनों प्रमुख दलों के बीच वोटों के अंतर से भी ज्यादा यानी 27,099 वोट नोटा के खाते में गए।
यह आंकड़ा जयपुर में चुनावी मुकाबले की दिलचस्प तस्वीर पेश करता है, जहां भाजपा ने अधिक वार्ड जीतकर बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल की, लेकिन कुल मतों में कांग्रेस आगे रही।
निकाय चुनाव के आंकड़ों में कुछ चौंकाने वाले परिणाम भी सामने आए। डीग जिले की पहाड़ी नगरपालिका में मतदान प्रतिशत अधिक रहने के बावजूद कांग्रेस को महज एक वोट मिलने का दावा किया गया है। वहीं नोखा नगरपालिका में कांग्रेस को एक भी वोट नहीं मिला।
ऐसे परिणामों ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों और उम्मीदवारों के प्रभाव को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
निकाय चुनाव के बाद अब सबसे ज्यादा सस्पेंस उन निकायों में है, जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिली हैं। ऐसे में सत्ता की चाबी निर्दलीय पार्षदों के हाथ में है।
भरतपुर में भी निर्दलीयों ने बड़ा प्रदर्शन किया है। यहां 36 निर्दलीय पार्षदों की जीत ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में बोर्ड गठन को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति तेज होने की संभावना है।
निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कई जगहों पर पार्षदों की बाड़ेबंदी और संपर्क साधने की कवायद शुरू हो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्दलीय पार्षद किस दल के साथ जाते हैं और प्रदेश की शहरी सरकारों के गठन में उनकी भूमिका कितनी निर्णायक रहती है।