Rajasthan

विधानसभा में रविंद्र सिंह भाटी ने खेजड़ी, ओरण और गोचर संरक्षण के लिए कानून बनाने की मांग की

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने गुरुवार को विधानसभा में खेजड़ी, ओरण और गोचर का मुद्दा उठाया। प्रदेश में खेजड़ी संरक्षण को लेकर कानून लगाू करने की मांग की। भाटी ने कहा- पश्चिमी राजस्थान में 26 लाख खेजड़ी काटी जा चुकी है।

50 लाख खेजड़ी के पेड़ और काटने की तैयारी है।

उन्होंने कहा- हर जिला ओरण, गोचर और खेजड़ी की रक्षा के लिए खड़ा है। खेजड़ी बचाने के लिए जन आंदोलन हो रहे है। सरकार को खेजड़ी संरक्षण कानून बनाना चाहिए।

दरअसल, बाड़मेर, जैसलमेर समेत पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में सोलर कंपनियां सोलर लगाने का काम कर रही है। इस दौरान खेजड़ी के पेड़ों को काटा जा रहा है। वहीं जैसलमेर में ओरण को सरकार रिकॉर्ड में दर्ज करने को लेकर जैसलमेर से जयपुर तक पैदल यात्रा निकाली जा रही है। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विधानसभा में शून्यकाल में खेजड़ी, ओरण और गोचर के संरक्षण के संबंध में बोलते हुए कहा- खेजड़ी मात्र पेड़ नहीं है। मरुस्थलीय राजस्थान में जल, जीवन और जलवायु, जीविका का आधार है।

मां अमृतादेवी समेत 363 लोगों ने खेजड़ी की रक्षा के लिए अपनी प्राण का बलिदान देकर खेजड़ी पेड़ को बचाया। आज उसी खेजड़ी को अंधाधुंध काट जा रहा है।

इससे क्षेत्र की संस्कृति, पर्यावरण, पारिस्थितिकी, सामाजिक और आर्थिक संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। पिछले 15 सालों से जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर ओर बीकानेर में 26 लाख से अधिक खेजड़ी के पेड़ काटे जा चुके है। भाटी ने कहा राजस्थान उस मोड़ पर खड़ा है जहां उसका राज्य वृक्ष खेजड़ी, राज्य पशु ऊंट, राज्य पक्षी गोडावण तीनों विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुका है। कहीं हम आखरी पीढ़ी तो नहीं है। जो पाबूजी, गोगाजी, मेहाजी हड़बू जी, जाम्भोजी, रामदेव जी, तेजा जी, आलाजी, पनराज जी जैसे हमारे पूर्वजों की ओर से गोधन, खेजड़ी और ओरण की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष और बलिदान के स्वर्णिम इतिहास को समाप्त कर रहे है।

हमने अपनी पीढ़ियों की धरोहर सोंपी है। लेकिन स्थानीय लोगों को न बिजली मिली, न सीएसआर का लाभ मिला और न ही युवाओं को रोजगार मिला। पारिस्थितिकी तंत्र, पशुधन और चारागाह का नाश हुआ है और पलायन बढ़ा है।

वे बोले- आज प्रत्येक जिला ओरण, गोचर और खेजड़ी की रक्षा के लिए खड़ा है। मैं इन जन आंदोलन कों पूर्ण समर्थन देता हूं और प्रदेश सरकार से विशेष आग्रह करता हूं कि खेजड़ी संरक्षण कठोर कानून बनाया जाए ताकि इनको बचाया जा सके।