जयपुर: राजस्थान में प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षित पहुंच के लिए संचालित '104 जननी एक्सप्रेस' एंबुलेंस सेवा के संचालन में गंभीर लापरवाही सामने आई है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने एंबुलेंस का संचालन कम पाए जाने पर प्रदेश के 10 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें सवाई माधोपुर, जोधपुर, जैसलमेर और जालोर सहित कई अन्य जिलों के अधिकारी शामिल हैं।
एनएचएम (NHM) की ओर से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को अस्पताल पहुंचाने और प्रसव के बाद घर तक सुरक्षित छोड़ने के लिए सभी जिलों में 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा दी जाती है। हाल ही में जब विभाग द्वारा आंतरिक ऑडिट करवाई गई, तो यह बात सामने आई कि कई जिलों में जितनी एंबुलेंस स्वीकृत हैं, धरातल पर उनसे भी कम संख्या में एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है।
एंबुलेंस का संचालन 100 फीसदी न होने पर स्वास्थ्य विभाग ने पहले भी अधिकारियों पर नकेल कसने की कोशिश की थी:
वीसी में चेतावनी: एंबुलेंस के कम संचालन के मामले में एनएचएम ने पहले सभी संबंधित सीएमएचओ (CMHO) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए आयोजित बैठक में कड़ी चेतावनी दी थी।
16 जुलाई को नोटिस: चेतावनी का असर न होने पर एनएचएम मिशन निदेशक ने 16 जुलाई को सभी 10 जिलों के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
लापरवाही बरकार: इसके बावजूद, न तो किसी अधिकारी ने नोटिस का समय पर जवाब दिया और न ही अपने-अपने जिलों में एंबुलेंस का शत-प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करवाया।
अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये पर कड़ा संज्ञान लेते हुए एनएचएम ने अब सख्त रुख अपनाया है:
अंतिम अल्टीमेटम: नोटिस मिलने के बाद सभी संबंधित सीएमएचओ अधिकारियों को 3 दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण और जवाब देने का आदेश दिया गया है।
कार्रवाई की चेतावनी: एनएचएम प्रबंधन ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।