8 अगस्त को स्कॉर्पियो और स्कूल बस की आमने-सामने की भिड़ंत में गंभीर रूप से घायल हुई लक्षिता जीवन की जंग हार गई:
गंभीर चोटें: लक्षिता कुमावत (15) के हाथ-पैर में फ्रैक्चर था और कमर में गंभीर चोट लगने के कारण अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही थी।
इलाज के दौरान मौत: जयपुर के एसएमएस (SMS) ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर उसके ऑपरेशन की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम के पश्चात शव परिजनों को सौंप दिया गया।
छात्रा की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने जब निजी स्कूलों की गाड़ियों की जांच की तो हैरान कर देने वाला नजारा सामने आया:
भयानक ओवरलोडिंग: ग्रामीणों द्वारा रोकी गई 42 सीटर बस में क्षमता से दोगुने से भी अधिक यानी 92 मासूम बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंसकर भरा गया था।
नियमों की अनदेखी: बसों पर परिवहन विभाग का अनिवार्य नियम 'बाल वाहिनी' तक नहीं लिखा हुआ था और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था।
प्रदर्शन के दौरान स्कूल बस चालकों की मनमानी भी सामने आई:
बच्चों को अंदर किया बंद: ग्रामीणों के अनुसार, आईपीएस स्कूल की एक बस के चालक ने बस रोके जाने के बाद बच्चों से भरी बस को अंदर से लॉक कर दिया और किसी को अंदर नहीं जाने दिया।
चालक की अभद्रता: एक अन्य बस ड्राइवर ने ग्रामीणों से बहस करते हुए गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया कि "हम आपके पास बच्चे लेने नहीं आते, आप खुद बच्चों को हमारे पास भेजते हैं।"
इस पूरी लापरवाही पर स्कूल प्रबंधन अपनी जवाबदेही से बचता नजर आया:
प्रबंधन का तर्क: आईपीएस स्कूल प्रबंधन से जुड़े भगवान सहाय चौधरी ने कहा कि बसें अभिभावकों की सहमति से ही संचालित की जाती हैं।
किराए का बहाना: उन्होंने कहा कि एक बच्चे के परिवहन पर प्रतिमाह करीब 3 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि कई अभिभावक 500 रुपये देने में भी आनाकानी करते हैं। यदि अभिभावक पूरा किराया देने को तैयार हों, तो अतिरिक्त बसें लगाई जा सकती हैं।