Rajasthan

जोबनेर स्कूल बस हादसे में घायल 15 वर्षीय लक्षिता की मौत: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, 4 बसों को रोका

जोबनेर: जोबनेर-महला मार्ग पर दो दिन पूर्व हुए भीषण स्कूल बस हादसे में गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय छात्रा लक्षिता कुमावत की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। छात्रा की मौत की खबर फैलते ही क्षेत्र में भारी जनआक्रोश फैल गया। गुस्साए ग्रामीणों और अभिभावकों ने सड़क पर उतरकर निजी स्कूलों की चार बसों को रोककर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान निजी स्कूलों की भारी लापरवाही उजागर हुई।

 

एसएमएस ट्रॉमा सेंटर में तोड़ा दम; ऑपरेशन से पहले ही थम गईं सांसें

8 अगस्त को स्कॉर्पियो और स्कूल बस की आमने-सामने की भिड़ंत में गंभीर रूप से घायल हुई लक्षिता जीवन की जंग हार गई:

  • गंभीर चोटें: लक्षिता कुमावत (15) के हाथ-पैर में फ्रैक्चर था और कमर में गंभीर चोट लगने के कारण अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही थी।

  • इलाज के दौरान मौत: जयपुर के एसएमएस (SMS) ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर उसके ऑपरेशन की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम के पश्चात शव परिजनों को सौंप दिया गया।

 

42 सीटर बस में ठूंस-ठूंसकर भरे थे 92 बच्चे; 'बाल वाहिनी' नियम गायब

छात्रा की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने जब निजी स्कूलों की गाड़ियों की जांच की तो हैरान कर देने वाला नजारा सामने आया:

  • भयानक ओवरलोडिंग: ग्रामीणों द्वारा रोकी गई 42 सीटर बस में क्षमता से दोगुने से भी अधिक यानी 92 मासूम बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंसकर भरा गया था।

  • नियमों की अनदेखी: बसों पर परिवहन विभाग का अनिवार्य नियम 'बाल वाहिनी' तक नहीं लिखा हुआ था और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था।

 

बस को अंदर से लॉक कर भागे ड्राइवर, ग्रामीणों से की बहस

प्रदर्शन के दौरान स्कूल बस चालकों की मनमानी भी सामने आई:

  • बच्चों को अंदर किया बंद: ग्रामीणों के अनुसार, आईपीएस स्कूल की एक बस के चालक ने बस रोके जाने के बाद बच्चों से भरी बस को अंदर से लॉक कर दिया और किसी को अंदर नहीं जाने दिया।

  • चालक की अभद्रता: एक अन्य बस ड्राइवर ने ग्रामीणों से बहस करते हुए गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया कि "हम आपके पास बच्चे लेने नहीं आते, आप खुद बच्चों को हमारे पास भेजते हैं।"

 

स्कूल प्रबंधन ने झाड़ा पल्ला, अभिभावकों पर मढ़ दिया दोष

इस पूरी लापरवाही पर स्कूल प्रबंधन अपनी जवाबदेही से बचता नजर आया:

  • प्रबंधन का तर्क: आईपीएस स्कूल प्रबंधन से जुड़े भगवान सहाय चौधरी ने कहा कि बसें अभिभावकों की सहमति से ही संचालित की जाती हैं।

  • किराए का बहाना: उन्होंने कहा कि एक बच्चे के परिवहन पर प्रतिमाह करीब 3 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि कई अभिभावक 500 रुपये देने में भी आनाकानी करते हैं। यदि अभिभावक पूरा किराया देने को तैयार हों, तो अतिरिक्त बसें लगाई जा सकती हैं।

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