जयपुर: राजस्थान परिवहन विभाग ने सरकारी राजस्व में सेंध लगाने वाले बस संचालकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरटीओ (RTO) प्रथम कार्यालय की ओर से सड़कों पर बिना टैक्स जमा कराए धड़ल्ले से चल रही निजी और अन्य बसों के खिलाफ 7 दिवसीय विशेष जांच अभियान शुरू किया गया है। विभाग ने ऐसी 360 बसों की सूची तैयार की है, जिनसे बकाया टैक्स की वसूली की जानी है।
आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि विभाग ने डेटाबेस के जरिए ऐसी बसों की पहचान की है जिनका टैक्स लंबे समय से बकाया है, लेकिन वे अभी भी सड़कों पर संचालित हो रही हैं।
लक्ष्य: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लंबित रेवेन्यू (राजस्व) की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करना है।
कड़ी कार्रवाई: इन बसों को सड़क पर देखते ही तुरंत सीज करने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए परिवहन विभाग ने अपनी सभी फ्लाइंग स्क्वॉड (उड़न दस्तों) को फील्ड में उतार दिया है।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी: विभाग ने प्रत्येक इंस्पेक्टर को चिन्हित बसों की एक निश्चित संख्या का टारगेट दिया है।
सख्त निर्देश: जांच के दौरान यदि कोई बस बिना टैक्स के पाई जाती है, तो उसे मौके पर ही सीज किया जाएगा। बस को तभी छोड़ा जाएगा जब संचालक पूरा बकाया टैक्स और पेनल्टी जमा कर देगा।
आरटीओ प्रथम ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है।
जवाबदेही: यदि कोई इंस्पेक्टर अपने आवंटित टारगेट के अनुसार वसूली करने में विफल रहता है या कार्य में ढिलाई बरतता है, तो उसके खिलाफ मुख्यालय को प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी जाएगी।
समीक्षा: सात दिन के भीतर पूरे अभियान की प्रगति की गहन समीक्षा की जाएगी।
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए डीटीओ (DTO) नाथु सिंह को मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है।
डेली रिपोर्टिंग: फील्ड टीमें रोजाना कितनी बसों की जांच कर रही हैं और कितना टैक्स वसूल किया गया है, इसकी रिपोर्ट प्रतिदिन ली जा रही है।
प्रभावी नेटवर्क: सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है ताकि चिन्हित बसें विभाग की नजरों से बच न सकें।
परिवहन विभाग का मानना है कि इस सख्त कार्रवाई से उन बस संचालकों में डर पैदा होगा जो जानबूझकर टैक्स की चोरी करते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सड़कों पर चलने का अधिकार उन्हीं वाहनों को है जो नियमानुसार अपना टैक्स और दस्तावेज पूरे रखते हैं। इस 7 दिवसीय अभियान के बाद भी नियमित जांच जारी रहेगी।