Rajasthan

बांसवाड़ा में वसुंधरा ने मंच से पुरुषों को उतारा, महिलाओं को बिठाया, रूठीं जिलाध्यक्ष से बोलीं- 'बस, अब एक शब्द और नहीं'

बांसवाड़ा: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बांसवाड़ा दौरे के दौरान 'नारी शक्ति वंदन' कार्यक्रम में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मंच पर बैठने और स्वागत सूची में नाम न होने को लेकर महिला नेताओं की नाराजगी सामने आई, जिसे राजे ने अपने सख्त और सधे हुए अंदाज में शांत कराया।

 

राजे का कड़ा निर्देश: "मंच महिलाओं के लिए है, पुरुष सामने बैठें"

भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत में ही वसुंधरा राजे ने महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए प्रोटोकॉल बदल दिया।

  • सीटों का फेरबदल: उन्होंने मंच पर बैठे सभी पुरुष पदाधिकारियों को नीचे दर्शकों के बीच बैठने के लिए कहा।

  • प्राथमिकता: राजे ने स्पष्ट किया कि 'नारी शक्ति' कार्यक्रम में महिलाओं को ही अग्रिम पंक्ति और मंच पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके निर्देश पर पुरुष नेता मंच से उतर गए और उनकी जगह महिला कार्यकर्ता बैठ गईं।

 

जिलाध्यक्ष शीतल भंडारी की नाराजगी: जमीन पर जा बैठीं

मंच पर जगह के पुनर्गठन के दौरान महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष शीतल भंडारी ने उपेक्षा का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई।

  • तल्ख तेवर: भंडारी ने कहा कि उन्हें मंच पर उचित स्थान नहीं मिला और वे विरोध स्वरूप वसुंधरा राजे के सामने ही जमीन पर जाकर बैठ गईं।

  • मान-मनुहार: राजे ने स्नेह के साथ उन्हें 'मेरी बहन' कहकर पुकारा और मंच पर आने का आग्रह किया, लेकिन भंडारी अपनी बात पर अड़ी रहीं और तर्क देने लगीं।

 

"अब एक शब्द नहीं": राजे की सख्ती के आगे झुकीं जिलाध्यक्ष

जब काफी देर तक मान-मनुहार के बाद भी शीतल भंडारी शांत नहीं हुईं, तो वसुंधरा राजे ने कड़ा रुख अपनाया।

  • अनुशासन: राजे ने उन्हें बीच में टोकते हुए कहा— "मैं यहां बड़ी मुश्किल से पहुंची हूं। बस, अब एक और शब्द नहीं।" * असर: राजे के इस आदेशात्मक लहजे के बाद भंडारी चुप हो गईं और जमीन से उठकर आवंटित कुर्सी पर बैठ गईं। हालांकि, कार्यक्रम के बाद उन्होंने यह कहकर विवाद को खत्म किया कि "पार्टी मेरी मां है, राजे का आज भी क्रेज है।"

 

प्रदेश प्रवक्ता निर्मला मकवाना ने भी छोड़ा कार्यक्रम

नाराजगी का सिलसिला यहीं नहीं थमा। निवर्तमान प्रधान और महिला मोर्चा की प्रदेश प्रवक्ता निर्मला मकवाना बीच में ही कार्यक्रम छोड़कर चली गईं।

  • उपेक्षा का आरोप: मकवाना ने जिला कार्यकारिणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिनके पास पद नहीं है, उन्हें मंच मिल रहा है, जबकि संगठन की जिम्मेदारी संभालने वालों का नाम स्वागत सूची तक में नहीं रखा गया।

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