Rajasthan

जोजरी नदी प्रदूषण मामला: CETP के 5 पदाधिकारी कोर्ट से जमानत पर रिहा, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जोधपुर की जोजरी नदी में अवैध पाइपलाइन के जरिए फैक्ट्रियों का जहरीला और दूषित पानी बहाने के मामले में गिरफ्तार किए गए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के पांच पदाधिकारियों को सोमवार को कोर्ट से जमानत मिल गई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई। आरोपियों को सरकारी वाहन की बजाय निजी गाड़ी से कोर्ट लाना और मीडिया की नजरों से बचाकर पेश करना चर्चा का विषय बना रहा।

पुलिस ने इस मामले में CETP के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) जसराज बोथरा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलेश संचेती, ट्रेजरर सांगसिंह परिहार, ट्रस्टी सुरेश खेमानी और सुपरवाइजर गोपाल को गिरफ्तार किया था। सोमवार को पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

कोर्ट परिसर में पुलिस के रवैये को लेकर कई सवाल उठे। आमतौर पर पुलिस आरोपियों को सरकारी वाहन से कोर्ट लाती है और उनकी तस्वीरें भी सार्वजनिक की जाती हैं, लेकिन इस मामले में पांचों आरोपियों को निजी वाहन से कोर्ट लाया गया। इतना ही नहीं, उन्हें मीडिया के कैमरों से बचाते हुए गुप्त तरीके से अदालत के भीतर ले जाया गया। इसको लेकर पुलिस पर प्रभावशाली आरोपियों को विशेष सुविधा देने के आरोप लग रहे हैं।

आरोपी पक्ष की ओर से पेश हुए अधिवक्ता नमन मोहनोत ने बताया कि पुलिस ने पहले आरोपियों को धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी किया था और सभी आरोपी जांच में लगातार सहयोग कर रहे थे। इसके बावजूद 2 अगस्त को अचानक उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि जब आरोपी जांच में सहयोग कर रहे थे और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं था, तब गिरफ्तारी का औचित्य क्या था।

अधिवक्ता के अनुसार, जब कोर्ट ने पुलिस से गिरफ्तारी का आधार पूछा तो पुलिस ने कहा कि उन्हें ऐसा "लग रहा था" कि आरोपियों ने अपराध किया है। लेकिन पुलिस अदालत के समक्ष कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी को अनुचित बताया और जमानत की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

नमन मोहनोत ने यह भी बताया कि इसी मामले में सबसे पहले गिरफ्तार किए गए ठेकेदार प्रवीण शर्मा को पहले ही जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने उस आदेश का हवाला भी कोर्ट में दिया, जिसके बाद पांचों आरोपियों को भी राहत मिल गई।

गौरतलब है कि जोजरी नदी में प्रदूषण फैलाने के मामले में 29 मई को विवेक विहार और बोरानाडा थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि अवैध पाइपलाइन के जरिए औद्योगिक इकाइयों का दूषित और जहरीला पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा था, जिससे पर्यावरण और आसपास के क्षेत्रों पर गंभीर असर पड़ा।

मामले की जांच में शुरुआती ढिलाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने जांच में सुस्ती पर सवाल उठाते हुए पुलिस को फटकार लगाई थी। इसके बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए CETP के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की, लेकिन अब कोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाने और आरोपियों को विशेष सुविधा देने के आरोपों ने पुलिस की कार्रवाई पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में भी प्रस्तावित है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच की दिशा और पुलिस की भूमिका पर न्यायालय की नजर बनी रहेगी।