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जयपुर सामाजिक सौहार्द की मिसाल, विवाद समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है मध्यस्थता : सीजेआई सूर्यकांत

जयपुर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि जयपुर सामाजिक सौहार्द और समावेशी सोच का प्रतीक शहर है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर शांति और विवाद समाधान को समर्पित कॉमनवेल्थ पीस, मीडिएशन एंड रूल्स ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस के आयोजन के लिए इससे बेहतर स्थान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता (मीडिएशन) का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पक्ष की आवाज दूसरे पक्ष की आवाज को दबा न सके और संवाद के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकले।

जयपुर के टोंक रोड स्थित होटल ललित में शुक्रवार से शुरू हुई तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि दुनिया आज वैश्विक शांति की बात कर रही है, जहां देशों की सीमाओं से आगे बढ़कर संवाद और सहयोग को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विवाद चाहे दो पड़ोसियों के बीच किसी छोटी-सी जमीन या रास्ते को लेकर हो अथवा दो देशों के बीच युद्धविराम जैसा बड़ा मुद्दा, हर स्थिति में समाधान का मूल आधार संवाद, विश्वास और मध्यस्थता ही होता है।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में 52 कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ, मध्यस्थता विशेषज्ञ और कानूनी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य न्यायिक प्रणाली में मध्यस्थता को अधिक प्रभावी बनाना और वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) की संस्कृति को बढ़ावा देना है। यह सम्मेलन 2 अगस्त तक चलेगा।

ग्राम पंचायतों की परंपरा का किया उल्लेख

सीजेआई सूर्यकांत ने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले गांवों में जब वकील या औपचारिक न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं होती थी, तब ग्राम पंचायतें आपसी संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान करती थीं। उन्होंने कहा कि उस समय भी विवाद समाप्त होने के बाद पंचायत का नेतृत्व समाज को साथ लेकर आगे बढ़ाता था और आज भी मध्यस्थ की भूमिका इसी विश्वास और संतुलन पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि समय बदला है, लेकिन विवाद समाधान का मूल सिद्धांत आज भी वही है—दोनों पक्षों को समान अवसर देना, उनकी बात ध्यान से सुनना और ऐसा समाधान निकालना जिसे दोनों स्वीकार कर सकें।

सुनने की कला सबसे बड़ी योग्यता

सीजेआई ने कहा कि एक सफल मध्यस्थ बनने के लिए केवल कानून का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है दोनों पक्षों की बात धैर्यपूर्वक सुनना और उनकी भावनाओं तथा परिस्थितियों को समझना। उन्होंने कहा कि मध्यस्थ को दोनों पक्षों के बीच विश्वास का पुल बनना पड़ता है।

उन्होंने कहा, "यह कोई सामान्य कौशल नहीं है। कानूनी पेशे में यह सबसे कठिन स्किल्स में से एक है। इसे विकसित करने के लिए लगातार प्रशिक्षण, अनुभव और सीखने की आवश्यकता होती है।"

सीजेआई ने कहा कि मध्यस्थता का उद्देश्य किसी एक पक्ष को विजेता और दूसरे को पराजित घोषित करना नहीं, बल्कि ऐसा समाधान निकालना है जिससे दोनों पक्ष सम्मानपूर्वक आगे बढ़ सकें।

राजस्थान मध्यस्थता में देश में दूसरे स्थान पर

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और न्यायिक संस्थाओं में विश्वास मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने बताया कि राजस्थान मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के निपटारे में देशभर में दूसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि राज्य की न्यायिक व्यवस्था, विधिक सेवा प्राधिकरण और न्यायपालिका के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक न्याय व्यवस्था केवल न्याय देने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की आसान और सुलभ पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

इतिहास से सीखने की जरूरत : तुषार मेहता

कार्यक्रम में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी मध्यस्थता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा संघर्ष से पहले संवाद और समझौते को प्राथमिकता देती रही है।

उन्होंने रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के पास युद्ध जीतने की पूरी क्षमता थी, फिर भी उन्होंने पहले शांति और समझौते का प्रयास किया। इसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध से पहले दुर्योधन के पास शांति का प्रस्ताव लेकर दूत भेजा।

उन्होंने कहा कि ये उदाहरण बताते हैं कि समझौते का प्रयास करना सभ्यता और परिपक्वता का प्रतीक है। हालांकि यदि कोई पक्ष संवाद के लिए तैयार न हो, तो कभी-कभी संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय सहभागिता से मिलेगा नया दृष्टिकोण

सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में जाम्बिया के सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश आभा नायर पटेल, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित देश-विदेश के अनेक न्यायविद और विधि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में न्यायिक सुधार, मध्यस्थता की आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय अनुभव, वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली तथा कॉमनवेल्थ देशों के बीच सहयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत में मध्यस्थता की संस्कृति को मजबूत करने के साथ-साथ न्यायालयों पर बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने और लोगों को त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस अवसर पर वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि न्याय केवल अदालतों के निर्णय से नहीं, बल्कि समाज में विश्वास, संवाद और सहमति की संस्कृति विकसित करने से भी स्थापित होता है। मध्यस्थता इसी दिशा में सबसे प्रभावी और मानवीय माध्यम बनकर उभर रही है।