डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए कहा कि जिला कलेक्टर (DM) और उपखंड अधिकारी (SDM) जैसे प्रशासनिक अधिकारियों पर निष्पक्ष तरीके से काम न करने का दबाव डाला जा रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक तंत्र का उपयोग राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि चुनाव कराने वाली मशीनरी को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में अधिकारियों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि निष्पक्ष चुनाव किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
डोटासरा ने यह भी आरोप लगाया कि निकाय चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों और उनके परिवारों को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि मजबूत दावेदारों पर विभिन्न माध्यमों से दबाव बनाया जा रहा है ताकि वे चुनावी मैदान से पीछे हट जाएं। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास कई क्षेत्रों में मजबूत उम्मीदवारों की कमी है, इसलिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर चुनावी माहौल प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
अपने बयान में डोटासरा ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि राजस्थान में किस प्रकार की लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और निकाय चुनाव में इसका जवाब मतपेटियों के माध्यम से दिया जाएगा।
डोटासरा के आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में है, जबकि भाजपा और प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निकाय चुनाव के नजदीक आते ही प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि डोटासरा के आरोपों पर सत्ता पक्ष क्या जवाब देता है और यह विवाद चुनावी माहौल को कितना प्रभावित करता है।