जयपुर: प्रदेश में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। 1 मई से शुरू होने वाले इस विशाल कार्य को निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए जनगणना निदेशालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने तक इसमें शामिल करीब 1.60 लाख अधिकारी और कर्मचारी एक ही स्थान पर टिके रहेंगे।
जनगणना निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जनगणना कार्य में जुटे कर्मचारियों के तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।
इन पर पड़ेगा असर: इस सूची में चार्ज अफसर, प्रगणक (Enumerators), सुपरवाइजर, फील्ड ट्रेनर के साथ-साथ शिक्षक, लेक्चरर, ग्राम सेवक, पटवारी, तहसीलदार और नगर निगम आयुक्त जैसे पद शामिल हैं।
क्यों जरूरी है रोक: जनगणना एक तकनीकी और प्रशिक्षण आधारित कार्य है। बीच में कर्मचारी के बदलने से डेटा की शुद्धता और काम की गति प्रभावित होती है, इसलिए करीब एक साल तक तबादले नहीं हो सकेंगे।
इस बार की जनगणना में तकनीक का खास ख्याल रखा गया है। आमजन को खुद का ब्यौरा दर्ज करने की सुविधा दी गई है।
समय सीमा: 1 मई से 15 मई तक जनगणना पोर्टल आम जनता के लिए खुला रहेगा।
स्मार्टफोन से सुविधा: लोग अपने स्मार्टफोन या डेस्कटॉप के जरिए पोर्टल पर 'सेल्फ सेंसस' (स्वयं जनगणना) कर सकेंगे। इसमें मकान लिस्टिंग से जुड़े कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे।
डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इस बार प्रगणकों को भी डिजिटल सुविधाएं दी गई हैं।
सत्यापन अनिवार्य: यदि कोई नागरिक पोर्टल पर खुद अपनी जानकारी भरता है, तो भी प्रगणक (Enumerator) उसके घर जाकर उस जानकारी का सत्यापन (Verification) अनिवार्य रूप से करेंगे।
डिजिटल किट: पहले चरण में ही प्रगणकों को मोबाइल ऐप और डिजिटल टूल्स से लैस किया गया है ताकि डेटा एंट्री में कोई त्रुटि न हो।
जनगणना निदेशक ने बताया कि इस कार्य के लिए 1.60 लाख कर्मचारियों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है। इन सभी को अलग-अलग स्तरों पर ट्रेनिंग दी जा चुकी है। राज्य सरकार जल्द ही इन कर्मचारियों के तबादलों पर आधिकारिक रोक के आदेश जारी कर देगी, जिससे फील्ड वर्क में कोई बाधा न आए।