गहलोत ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर आगे बढ़ेगी और राजस्थान में अगली सरकार बनाने के लिए एकजुट होकर काम करेगी। गहलोत ने पूरे विवाद को मीडिया की ओर से उठाए गए सवालों का नतीजा बताया और कहा कि जिन बातों की पूरी जानकारी नहीं होती, उन पर प्रतिक्रिया देना मुश्किल होता है।
गहलोत ने कहा, “हम सब एक हैं, एक होकर चलेंगे, एक होकर सरकार बनाएंगे और राजस्थान में सरकार बनना निश्चित है। बाकी सारी बातें छोड़ दीजिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो डोटासरा उनसे नाराज हैं और न ही उनके बीच किसी तरह का मतभेद है। उन्होंने कहा कि डोटासरा ने सिर्फ वही बात रखी जो उन्हें उस समय महसूस हुई।
दरअसल, पूरा मामला पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के साथ भारत आदिवासी पार्टी (BAP) से कांग्रेस में आए कुछ कार्यकर्ताओं के गहलोत आवास पहुंचने के बाद शुरू हुआ। गहलोत के बंगले पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री को चौथी बार मुख्यमंत्री बनाने के समर्थन में नारे लगाए थे।
इसके बाद जब ये कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे तो वहां प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने महेंद्रजीत सिंह मालवीय को नारेबाजी को लेकर खरी-खरी सुनाई। डोटासरा ने व्यक्तिगत नेताओं के समर्थन में नारे लगाने की परंपरा पर सवाल उठाते हुए पार्टी की एकजुटता और संगठन को प्राथमिकता देने की बात कही थी।
हालांकि डोटासरा ने सीधे तौर पर अशोक गहलोत का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को राजनीतिक हलकों में गहलोत समर्थकों की ओर इशारा माना गया। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि कांग्रेस के भीतर नेताओं की व्यक्तिगत छवि और समर्थकों की राजनीति को लेकर खींचतान चल रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य बताते हुए कहा कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय केवल कार्यकर्ताओं के साथ उनसे मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि यह किसी तरह का पार्टी जॉइनिंग कार्यक्रम नहीं था।
गहलोत ने कहा कि मालवीय ने खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने का समय लिया था और उनका उद्देश्य केवल संगठन के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करना था। उन्होंने कहा कि न तो जॉइनिंग की कोई बात थी और न ही इसकी कोई चर्चा हुई थी।
उन्होंने कहा, “जॉइनिंग नेताओं की होती है, कार्यकर्ताओं की नहीं। करीब 400 कार्यकर्ता आए थे। कार्यकर्ता पार्टी का काम करता है। वे कब आए और कब चले गए, यह स्थानीय स्तर की बात है।”
गहलोत ने कहा कि यदि किसी दूसरी पार्टी के कार्यकर्ता कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में कार्यकर्ताओं का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
राजस्थान कांग्रेस इस समय संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावी रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पार्टी के बड़े नेताओं के बीच किसी भी तरह की खींचतान का संदेश राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि गहलोत ने बयान देकर पार्टी में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य केवल संगठन को मजबूत करना और जनता के मुद्दों को उठाना है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी नेता मिलकर काम करेंगे और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे।
वहीं, डोटासरा के बयान को भी संगठनात्मक अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष लगातार यह संदेश देते रहे हैं कि पार्टी में किसी एक नेता के बजाय संगठन सर्वोपरि है। उनके बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा दोनों ही महत्वपूर्ण चेहरे हैं। एक तरफ गहलोत का लंबा प्रशासनिक अनुभव और समर्थकों का मजबूत आधार है, वहीं डोटासरा संगठन की कमान संभाल रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच तालमेल पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालिया घटनाक्रम के बाद गहलोत का बयान यह संकेत देने की कोशिश है कि कांग्रेस के भीतर मतभेद नहीं हैं और पार्टी सभी नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में संगठन स्तर पर इस मामले का क्या असर दिखाई देता है।