यह दर्दनाक घटना जयपुर के झोटवाड़ा थाना इलाके के अग्रसेन नगर की है। बता दें कि डॉ. डिसानिया के दामाद डॉ. सुरेश चौधरी भी एसएमएस अस्पताल में ही न्यूरोसर्जन के पद पर कार्यरत हैं।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह डॉ. डिसानिया घर पर पूरी तरह अकेले थे। परिवार के अन्य सदस्य किसी शादी समारोह में शामिल होने के लिए बाहर गए हुए थे, जबकि उनका बेटा अविनाश डिसानिया सुबह करीब 6 बजे अपनी बहन को छोड़ने एयरपोर्ट गया हुआ था।
जब अविनाश सुबह एयरपोर्ट से वापस घर लौटा, तो कमरे का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। डॉ. डिसानिया कमरे के अंदर फंदे से लटके हुए थे।
बेटे और परिजनों ने आनन-फानन में डॉक्टर को फंदे से नीचे उतारा और तुरंत खातीपुरा स्थित एक नजदीकी प्राइवेट अस्पताल लेकर भागे। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया, जहां से उसे पोस्टमॉर्टम के लिए मॉर्च्युरी (शवगृह) में शिफ्ट कर दिया गया। घटना की भनक लगते ही मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों सहित भारी संख्या में सीनियर डॉक्टर्स मॉर्च्युरी पहुंचे।
डॉ. डिसानिया के शव का पोस्टमॉर्टम करने के लिए तीन डॉक्टरों के एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। इस टीम में डॉ. प्रियंका शर्मा, डॉ. ज्ञान प्रकाश गौड़ और डॉ. श्वेता गोयल शामिल हैं।
अस्पताल सूत्रों से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम के दौरान मेडिकल बोर्ड के सदस्यों को डॉ. डिसानिया के हाथ और पीठ पर कुछ संदिग्ध निशान दिखाई दिए हैं, जिससे मामले में सस्पेंस और बढ़ गया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है कि आखिर इतने सीनियर डॉक्टर ने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया।