Rajasthan

बांसवाड़ा में चिकित्सा तंत्र की बड़ी लापरवाही: प्रसूता की मौत पर फूटा परिजनों का गुस्सा

बांसवाड़ा: राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से स्वास्थ्य सेवाओं को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और संवेदनहीन घटना सामने आई है। जिले के गांगड़तलाई स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रसव (डिलीवरी) के बाद एक प्रसूता की समय पर इलाज न मिलने के कारण तड़प-तड़प कर मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने और संवेदनहीनता के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। यह पूरी दुखद घटना आनंदपुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांगड़तलाई CHC की है, जहां गुरुवार रात डिलीवरी के बाद नवजात मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी।

 

पहली डिलीवरी के बाद गिरने लगा था ब्लड प्रेशर

जानकारी के अनुसार, आनंदपुरी थाना क्षेत्र के तेजपुरा गांव की रहने वाली सरला (23 वर्ष) पत्नी रमेश की शादी करीब एक साल पहले ही हुई थी। प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) होने के बाद सरला को गुरुवार शाम करीब 6 बजे डिलीवरी के लिए गांगड़तलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया था।

गुरुवार रात करीब 12 बजे सरला ने अपनी पहली संतान को जन्म दिया। डिलीवरी होने के कुछ घंटों बाद ही अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसका ब्लड प्रेशर (बीपी) तेजी से नीचे गिरने लगा।

 

परिजनों का गंभीर आरोप- 'वार्ड में गहरी नींद सो रहा था स्टाफ, जगाने पर भी नहीं उठे'

मृतका के देवर विनेश कुमार मईड़ा ने अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता की पोल खोलते हुए बताया कि रात में जब सरला की हालत लगातार खराब हो रही थी, तो वह तुरंत वार्ड में ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ को बुलाने गए।

विनेश कुमार का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ उस समय अस्पताल में गहरी नींद में सो रहा था। उन्होंने कई बार आवाज लगाई और स्टाफ को जगाने की पूरी कोशिश की, लेकिन लापरवाही की हद पार करते हुए कोई भी समय पर अपनी जगह से नहीं उठा। स्टाफ की इसी घोर लापरवाही के कारण प्रसूता पूरी रात बिना इलाज के दर्द से तड़पती रही।


हालत बेहद नाजुक होने पर सुबह 6 बजे रेफर कर झाड़ा पल्ला

परिजनों के मुताबिक, पूरी रात तड़पने के बाद शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे सरला की हालत ब्लड प्रेशर लगातार कम होने के कारण अत्यंत गंभीर और नियंत्रण से बाहर हो गई। जब अस्पताल स्टाफ को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए प्रसूता को तत्काल बांसवाड़ा के महात्मा गांधी (MG) जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

परिजनों का साफ कहना है कि अगर रात को ही समय रहते सरला का इलाज शुरू कर दिया जाता या उसे पहले ही जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता, तो आज वह जिंदा होती।

 

नवजात मां ने रास्ते में तोड़ा दम, एक साल पहले ही हुई थी शादी

रेफर किए जाने के बाद परिजन सरला को एम्बुलेंस में लेकर बांसवाड़ा के एमजी अस्पताल के लिए रवाना हुए, लेकिन डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण महिला की हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उसने जिला अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ दिया। एमजी अस्पताल पहुंचने पर वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद सरला को 'मृत' घोषित कर दिया।

इस हृदयविदारक घटना से मृतका के परिवार में कोहराम मच गया है। नवजात बच्चा तो सुरक्षित है, लेकिन जन्म लेते ही उसने अपनी मां को हमेशा के लिए खो दिया। आनंदपुरी थाना पुलिस को भी इस घटनाक्रम की सूचना दी गई है और परिजन दोषी मेडिकल स्टाफ के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।

Similer Posts