Rajasthan

भीलवाड़ा में राज्यपाल बागड़े बोले- 'विश्व में अशांति, पर भारत एकजुट', नमोकार मंत्र को बताया शांति और सुरक्षा का अलौकिक मार्ग

भीलवाड़ा: राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े गुरुवार सुबह भीलवाड़ा के मेडिसिटी ग्राउंड पर 'इंटरनेशनल जैन ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन' (IJTO) द्वारा आयोजित विश्व नवकार महामंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने वैश्विक भू-राजनीति से लेकर आध्यात्मिक जीवन मूल्यों तक पर बेबाकी से अपने विचार रखे।

 

वैश्विक अशांति और भारत की स्थिति: "लंका जले, हनुमान बाहर"

वर्तमान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय संघर्षों (अमेरिका, इजराइल और ईरान) पर टिप्पणी करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दुनिया में इस समय शांति का अभाव है।

  • भारत के लिए अवसर: उन्होंने कहा, "अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे देश संघर्ष में उलझकर खुद को कमजोर कर रहे हैं, जो भारत की प्रगति के लिए ठीक है। भारत को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।"

  • अनोखा उदाहरण: राज्यपाल ने मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा, "उधर कुछ भी हो, जैसे लंका जले पर हनुमान बाहर, हमारे लिए भी वैसा ही चल रहा है। भारत अब एक मजबूत स्थिति में है और दुनिया ने अपना रुख बदलकर युद्धविराम की बात शुरू कर दी है।"

 

नमोकार मंत्र: आत्मशुद्धि और सशक्तिकरण का प्रतीक

राज्यपाल ने नवकार महामंत्र की महिमा का बखान करते हुए इसे भारतीय संस्कृति का आधार बताया।

  • अलौकिक मंत्र: उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इस मंत्र का जाप करता है, वह शांति, सुरक्षा और समृद्धि से स्वतः ही जुड़ जाता है।

  • मूल्य: यह मंत्र किसी व्यक्ति विशेष की स्तुति नहीं है, बल्कि अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे सिद्धांतों पर आधारित आत्मशुद्धि का मार्ग है। यह व्यक्ति को आंतरिक रूप से सशक्त बनाता है।

 

महाराष्ट्र की मांगीतुंगी प्रतिमा: विश्व में अद्वितीय

संबोधन के दौरान राज्यपाल ने महाराष्ट्र के मांगीतुंगी में स्थित भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का विशेष उल्लेख किया।

  • विश्व रिकॉर्ड: उन्होंने इसे दुनिया की सबसे ऊंची जैन प्रतिमा बताया, जिसे एक ही पत्थर (monolithic) से तराशकर बनाया गया है।

  • पर्यटन को बढ़ावा: उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतिमा पूरे विश्व में कहीं नहीं है और इससे क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

 

शब्दों का चयन और मौन का महत्व

राज्यपाल ने जीवन में संयमित वाणी के महत्व पर जोर देते हुए कहा:

  • सोच-समझकर बोलें: शब्द हमारी अभिव्यक्ति का माध्यम हैं, इसलिए उनका चयन बहुत सावधानी से करना चाहिए।

  • कम बोलने के फायदे: उन्होंने युवाओं और समाज को सीख दी कि जो व्यक्ति ज्यादा बोलता है, उसकी बात कोई नहीं सुनता। इसके विपरीत, कम बोलने वाले व्यक्ति की बात का महत्व और वजन ज्यादा होता है।

 

विकारों का त्याग और आत्मोन्नति

समारोह के अंत में राज्यपाल ने आह्वान किया कि मनुष्य को क्रोध, मोह और द्वेष जैसे आंतरिक शत्रुओं पर विजय पाकर आत्मोन्नति की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जैन तीर्थंकरों द्वारा दिखाए गए शांति और अहिंसा के मार्ग की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।

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